मैनपुरी के सभी तालाबों और झीलों के संरक्षण मामले में एनजीटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा ।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रमुख पीठ, नई दिल्ली ने जनपद मैनपुरी के सभी तालाबों और झीलों के संरक्षण से जुड़ी एक याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई की है।

अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह याचिका अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह द्वारा दाखिल की गई है।

इन अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस:

वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह के अनुसार, माननीय एनजीटी ने मैनपुरी के जलीय निकायों के संरक्षण की इस याचिका को स्वीकार कर लिया है।

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मामले में निम्नलिखित विपक्षीगणों को नोटिस जारी किए गए हैं:

* मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार

* प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश

* प्रमुख सचिव, सिंचाई व जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश

* प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश

* प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश

* अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

* जिलाधिकारी, मैनपुरी

* मुख्य विकास अधिकारी, मैनपुरी

* क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (क्षेत्रीय कार्यालय, आगरा)

* 4 अन्य संबंधित प्राइवेट पार्टियां

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याचिका का मुख्य आधार और विवरण:

अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने अधिकरण को अवगत कराया कि जनपद मैनपुरी में कुल 868 राजस्व ग्राम हैं।

अपनी याचिका के समर्थन में उन्होंने कई विशिष्ट ग्रामों और क्षेत्रों के तालाबों के राजस्व अभिलेख व अन्य प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत किए।

इनमें ग्राम अस्योली, तालिबपुर, थोरवा, नारायणपुर, धरमंगदपुर नगरिया, अठलकडा, आसफपुर, जैतूलपुर, ईसापुर खास, कुशलपुर, आरमसराय, अम्हेरा, अपूरपुर, अहमदपुर करुआमई, अकबरपुर विकू, अलीपुर पट्टी, अलीपुर खेड़ा, अहिरवां, ओंग, अजीतगंज, भोगांव के सोमनाथ ताल और मैनपुरी के देवपुरा देहात के तालाब शामिल हैं।

इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे जनपद के सभी राजस्व ग्रामों और नगर पालिका क्षेत्रों में स्थित तालाबों और झीलों को संरक्षित करने की प्रार्थना की गई है।

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एनजीटी के निर्देश और अगली सुनवाई:

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने विपक्षी जिलाधिकारी, मैनपुरी को विशेष निर्देश जारी किए हैं।

जिलाधिकारी को आदेश दिया गया है कि वह अगली सुनवाई से पूर्व, पुराने राजस्व अभिलेखों के साथ जनपद के सभी जलीय निकायों (वाटर बॉडीज) का पूर्ण और विस्तृत विवरण एक हलफनामे (शपथपत्र) के माध्यम से दाखिल करें।

इस महत्वपूर्ण विधिक मामले की अगली सुनवाई के लिए अधिकरण द्वारा 28 सितंबर की तिथि नियत की गई है।

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विवेक कुमार जैन
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