जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम) ने उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
फोरम ने वाहन खरीद के दौरान धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथा अपनाने के लिए एक प्रसिद्ध वाहन विक्रेता और एक निजी बैंक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।
यह मामला एक दशक से अधिक पुराना है, जिसका अब अंतिम रूप से निस्तारण हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा प्रकरण वर्ष 2005 का है। परिवादी राजीव गुप्ता ने 16 सितंबर 2005 को अशोक ऑटो सेल्स से 3,81,150/- रुपये की कीमत पर एक टाटा इंडिका कार खरीदी थी।
इस वाहन की खरीद के लिए उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक से ऋण भी लिया था।
विवाद तब उत्पन्न हुआ जब परिवादी ने आरोप लगाया कि विक्रेता ने कार खरीद पर 5,000/- रुपये की छूट देने का वादा किया था, लेकिन छूट देने के बजाय 5,000/- रुपये अतिरिक्त वसूल लिए गए।
मामले में वित्तीय अनियमितता का पहलू भी सामने आया। बैंक ने ऋण की मूल धनराशि 2,76,000/- रुपये दर्शाई थी, जबकि अशोक ऑटो सेल्स को केवल 2,66,450/- रुपये का ही भुगतान किया गया।
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सुनवाई के दौरान उपभोक्ता फोरम ने इन तथ्यों का गंभीरता से विश्लेषण किया और पाया कि दोनों विपक्षीगण ऑटो सेल्स और बैंक ने परिवादी को पूरी तरह से अंधकार में रखा।
फोरम ने स्पष्ट किया कि विक्रेता ने यह जानकारी छिपाई कि बैंक से कम ऋण राशि प्राप्त हुई है, जिसके कारण छूट की राशि को मूल कीमत में समायोजित किया जा रहा है।
न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने आपस में मिलकर उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया है, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत एक गंभीर मामला है।
फोरम की तत्कालीन पीठ ने 7 नवंबर 2014 को इस मामले में अपना निर्णय सुनाया था। आदेश में विपक्षीगण को निर्देशित किया गया था कि वे परिवादी से अधिक वसूली गई 10,000/- रुपये की धनराशि को वाहन खरीद की तिथि से 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करें।
इसके साथ ही, उपभोक्ता को हुए मानसिक संताप के लिए 1,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में भी 1,000/- रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।
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इस लंबे चले कानूनी संघर्ष का अंत आखिरकार जुलाई 2026 को हुआ (निष्पादन वाद संख्या: 35/2024)। डिक्रीदार/परिवादी राजीव गुप्ता के प्रार्थना पत्र के बाद प्रतिपक्षी द्वारा फोरम में धनराशि जमा की गई।
न्यायालय के आदेशानुसार, 16 जुलाई 2026 को परिवादी को 13,350/- रुपये (तेरह हजार तीन सौ पचास रुपये) का अकाउंट पेयी चेक (पंजाब नेशनल बैंक, चेक संख्या 097369) जारी किया गया, जिसे वर्तमान आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार द्वारा परिवादी राजीव गुप्ता को सौंपा ।
जिसके साथ ही इस प्रकरण का अंतिम रूप से पटाक्षेप हो गया है।
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