आगरा में चेक बाउंस मामले में आरोपी को 2 वर्ष की कैद और 5.50 लाख रुपये का जुर्माना

चेक न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-12 (एसीजेएम) माननीय अनुभव सिंह की अदालत ने चेक बाउंस (अनादरण) के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है।

न्यायालय ने आरोपी को दो वर्ष के कारावास और 5 लाख 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

न्यायालय में यह परिवाद वादी संजीव कुमार धनगर (पुत्र नरेंद्र पाल धनगर, निवासी मुरली विहार, शाहगंज, जिला आगरा) की ओर से दायर किया गया था।

मुकदमे के अनुसार, वादी की आरोपी दर्शन दयाल उर्फ डीके (पुत्र रतन सिंह, निवासी जाटव वाली बस्ती, नगला हवेली, दयाल बाग, जिला आगरा) के साथ लंबे समय से मित्रता थी।

अक्टूबर 2015 में आरोपी दर्शन दयाल ने अपनी इसी पुरानी मित्रता का हवाला देते हुए व्यापार के प्रयोजन से वादी से 4 लाख 13 हजार रुपये उधार लिए थे।

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काफी समय बीत जाने के बाद भी जब आरोपी ने वादी के रुपये वापस नहीं किए, तो वादी ने पैसों का तकाजा किया।

इसके बाद आरोपी ने भुगतान के तौर पर वादी को 4 लाख 13 हजार रुपये का एक चेक दे दिया।

जब वादी ने वह चेक भुगतान प्राप्त करने के लिए अपने बैंक में प्रस्तुत किया, तो वह बाउंस (डिसऑनर) हो गया।

चेक बाउंस होने के बाद वादी ने विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय की शरण ली और मुकदमा दायर किया।

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता ने अपने ठोस तर्क प्रस्तुत किए।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (12) माननीय अनुभव सिंह ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और अधिवक्ता की दलीलों का भली-भांति अवलोकन करने के बाद आरोपी दर्शन दयाल उर्फ डीके को चेक बाउंस का दोषी पाया। दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने उसे 2 वर्ष की कैद एवं 5 लाख 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।

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विवेक कुमार जैन
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