आगरा उपभोक्ता आयोग का शाओमी पर शिकंजा, खराब मोबाइल मामले में ग्राहक को मिला 21,305/- रुपये का हर्जाना

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शाओमी (Xiaomi) इंडिया और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर को उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार का दोषी ठहराया है।

आयोग के कड़े रुख के बाद कंपनी को हर्जाना भरना पड़ा और उपभोक्ता को डिक्री की धनराशि 21,305/- रुपये का चेक सौंपकर निष्पादन कार्यवाही को समाप्त किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि:

परिवादी राज कुमार ने 23 मई 2022 को आगरा के शाह टॉकीज के पास स्थित श्री श्यामजी मोबाइल पॉइंट से 11,800/- रुपये में एक रेडमी 10 (Redmi 10) मोबाइल खरीदा था, जिस पर एक वर्ष की वारंटी थी।

क्रय करने के 2-3 दिन बाद ही मोबाइल की टच स्क्रीन ने काम करना बंद कर दिया और फोन हैंग होने लगा।

परिवादी ने संजय प्लेस स्थित एम०आई० (MI) मोबाइल सर्विस सेंटर पर संपर्क किया, लेकिन वारंटी अवधि में होने के बावजूद दो बार प्रयास करने पर भी फोन ठीक नहीं किया जा सका।

तीसरी बार जब परिवादी 2 नवंबर 2022 को फोन लेकर गया, तो सर्विस सेंटर ने विनिर्माण दोष मानने के बजाय फोन ठीक करने के एवज में 4,305/- रुपये की मांग की और पैसे न देने पर मरम्मत करने से मना कर दिया।

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उपभोक्ता आयोग का निर्णय:

पीड़ित उपभोक्ता ने अपने अधिवक्ता सुनील कुमार तारौलिया के माध्यम से 19 दिसंबर 2022 को उपभोक्ता आयोग में परिवाद (संख्या-188/2022) दायर किया।

5 मई 2025 को आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि फोन को बार-बार सर्विस सेंटर ले जाने के बावजूद ठीक न हो पाना यह दर्शाता है कि उत्पाद में विनिर्माण दोष (Manufacturing Defect) था।

आयोग ने विपक्षीगण (शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर, डीलर और सर्विस सेंटर) को संयुक्त और पृथक रूप से आदेश दिया कि वे 45 दिनों के भीतर खराब फोन के बदले नया फोन दें या फोन की कीमत 11,800/- रुपये 6% वार्षिक साधारण ब्याज (परिवाद संस्थित करने की तिथि से) के साथ लौटाएं।

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इसके अलावा, मानसिक पीड़ा के लिए 3,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 3,000/- रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया। यह भी शर्त रखी गई कि 45 दिन में भुगतान न होने पर ब्याज दर 9% हो जाएगी।

निष्पादन और अंतिम भुगतान: आदेश का तय समय में अनुपालन न होने पर निष्पादन वाद (संख्या-44/2025) दाखिल किया गया। अंततः विपक्षी कंपनी द्वारा आयोग के खाते में ब्याज व हर्जाने सहित कुल 21,305/- रुपये की डिक्री धनराशि जमा की गई।

20 जून 2026 को आयोग ने पूर्ण संतुष्टि के आधार पर निष्पादन कार्यवाही समाप्त कर दी। इसके बाद 6 जुलाई 2026 को परिवादी राज कुमार को पंजाब नेशनल बैंक का 21,305/- रुपये का अकाउंट पेयी चेक (चेक संख्या: 097370) आयोग के अध्यक्ष के हस्ताक्षर से प्रदान किया गया, जिससे उपभोक्ता को न्याय मिला।

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विवेक कुमार जैन
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