आगरा।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय संगीता कुमारी की अदालत ने एक नाबालिग किशोरी के अपहरण, दुराचार और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में अहम फैसला सुनाया है।
न्यायालय ने मुख्य आरोपी और इस अपराध में उसका साथ देने वाले उसके भाई को दोषी करार देते हुए 7-7 वर्ष के कारावास और 32 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
थाना बाह में दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादिया की 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री 14 दिसंबर 2017 को दोपहर करीब 2:30 बजे घर से ट्यूशन जाने की बात कहकर निकली थी।
काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान परिजनों को पता चला कि किशोरी ट्यूशन के लिए कोचिंग सेंटर पहुंची ही नहीं थी।
वादिया की तहरीर के आधार पर थाना बाह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना की।
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पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी इमरान (पुत्र जलालुद्दीन, निवासी मोहल्ला सराय, बाह, जिला आगरा) किशोरी को अपने साथ बस में बैठाकर पहले फिरोजाबाद और फिर बाद में कानपुर ले गया था, जहां उसने किशोरी के साथ दुराचार किया।
इस पूरे कृत्य और आपराधिक षड्यंत्र में इमरान के सगे भाई सनी ने भी उसका पूरा सहयोग किया था। विवेचना पूरी करने के उपरांत पुलिस ने इमरान और सनी के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय संगीता कुमारी ने मामले की विस्तृत सुनवाई की।
अदालत ने विशेष लोक अभियोजक विमलेश आनंद के तर्कों, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का भली-भांति अवलोकन किया।
दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने मुख्य आरोपी इमरान को अपहरण, दुराचार और पॉक्सो एक्ट के तहत तथा उसके भाई सनी को आपराधिक षड्यंत्र व अपराध में सहयोग करने के आरोप में 7 वर्ष की कैद की सजा से दंडित किया। इसके साथ ही अदालत ने 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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