आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ जिले में एक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की कार्यप्रणाली और उनके खिलाफ शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि आरोपी बीएलओ के खिलाफ अब तक क्या दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई की गई है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ का आदेश:
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमुर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने मनीष कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 मार्च की तिथि नियत की है और स्पष्ट किया है कि तब तक आवश्यक विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
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वोटर लिस्ट में नाम न जोड़ने का आरोप:
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता परवेज इकबाल अंसारी ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए मऊ जिले के मानाजीत ग्राम पंचायत के बीएलओ राम प्रवेश राम पर गंभीर आरोप लगाए।
बहस के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
* आवेदन पर निष्क्रियता: बीएलओ जानबूझकर मतदाताओं के नाम जोड़ने के आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
* नियुक्ति में खेल: याचिका में आरोप लगाया गया कि पहले एक शिक्षक बीएलओ के रूप में अच्छा कार्य कर रहे थे, लेकिन उन्हें हटाकर राम प्रवेश राम को नियुक्त किया गया। बीच में उन्हें हटाया भी गया, लेकिन कुछ ही दिनों में दोबारा नियुक्त कर दिया गया।
* शिकायतों की अनदेखी: स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद प्रशासन इस मनमानी को रोकने में विफल रहा है।
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याचिका की मुख्य मांग:
याचिका में मांग की गई है कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए उक्त बीएलओ को तत्काल पद से हटाया जाए और उनके स्थान पर किसी निष्पक्ष अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
कोर्ट का रुख:
हाईकोर्ट ने मामले को चुनावी अधिकारों से जुड़ा हुआ मानते हुए सरकार और चुनाव आयोग से की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया है।
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