साक्ष्य के अभाव में चेक बाउंस के आरोप से महाराष्ट्र का व्यापारी दोषमुक्त

चेक न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

चेक बाउंस के एक मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या 9) माननीय मोहित कुमार प्रसाद की अदालत ने महाराष्ट्र के व्यापारी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।

अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी राजेश पांडेय को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।

मामले के अनुसार, मैसर्स महावीर ओवरसीज (बोदला बिचपुरी रोड) के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक सुरेश कुमार भंसाली ने वर्धा (महाराष्ट्र) स्थित मैसर्स सांई आर्थोटिक प्रोस्थोटिक्स सेंटर के प्रोपराइटर राजेश पांडेय के विरुद्ध परिवाद दायर किया था।

वादी का कहना था कि उनकी फर्म जूते व स्लीपर बनाने का कार्य करती है। आरोपी ने वर्ष 2015 में 11,25,180/- रुपये का माल खरीदा था, जिसके बदले 7,30,000/- रुपये का भुगतान किया गया।

शेष 3,95,180/- रुपये के बकाये के भुगतान के लिए आरोपी ने 30 सितंबर 2016 को एक्सिस बैंक वर्धा शाखा का एक चेक दिया था।

वादी फर्म ने उक्त चेक को अपनी यस बैंक, संजय प्लेस स्थित शाखा में प्रस्तुत किया, जहां वह अनादरित हो गया। विधिक नोटिस भेजने के बाद भी धनराशि न मिलने पर अदालत में वाद प्रस्तुत किया गया था।

मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी के अधिवक्ता चौधरी समीर ने वादी पक्ष के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक से जिरह की। जिरह के दौरान वादी का प्रतिनिधि अदालत के समक्ष अपनी फर्म की खाता संख्या तथा विवादित चेक की संख्या तक नहीं बता सका।

इसके अतिरिक्त, वह यह जानकारी भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसे पावर ऑफ अटॉर्नी कब और कहां दी गई थी तथा आरोपी ने चेक किस समय दिया था।

अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों की कमी को देखते हुए अधिवक्ता के तर्कों के आधार पर आरोपी व्यापारी को सभी आरोपों से बरी करने का फैसला सुनाया।

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विवेक कुमार जैन
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