आगरा।
तेरह वर्षीया किशोरी के साथ घर में घुसकर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर आरोपों से घिरे युवक को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने में चार दिन की देरी, चिकित्सीय परीक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि न होने और बयानों में गंभीर विरोधाभास को आधार मानते हुए आरोपी को बरी करने के आदेश दिए।
बरी होने वाला आरोपी अजय पुत्र जगदीश, शहीद नगर, थाना सदर, जिला आगरा का निवासी है।
थाना सदर में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, वादिया मुकदमा ने आरोप लगाया था कि वह घर में परचून की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करती है।
7 मई 2021 की दोपहर करीब दो बजे वह दुकान का सामान लेने बाजार गई थी, उस दौरान उसकी 13 वर्षीया पुत्री घर पर अकेली थी।
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आरोप के मुताबिक मौका पाकर आरोपी घर में घुस आया और उसने किशोरी के कपड़े फाड़कर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में वादिया मुकदमा, पीड़िता, डॉ. ममता किरन, डॉ. सीमा मेहरा, विवेचक सुरेंद्र पाल सिंह तथा पुलिसकर्मी आनंद प्रकाश को गवाह के रूप में पेश किया गया।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता अवधेश शर्मा ने दलील दी कि कथित घटना की रिपोर्ट चार दिन के विलंब से दर्ज कराई गई थी, जिसका कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।
इसके अतिरिक्त चिकित्सीय परीक्षण में भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई और वादिया तथा पीड़िता के बयानों में परस्पर गंभीर विरोधाभास रहे।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों की कमी और बचाव पक्ष के तर्कों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी अजय को संदेह का लाभ देकर बरी करने का फैसला सुनाया।
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