आगरा।
दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में समझौते के बाद पत्नी के साथ मारपीट करने और उसका जबरन गर्भपात कराने के गंभीर मामले में अदालत ने आरोपी पति को अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया है।
जिला जज की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पति होती लाल की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त करने के आदेश दिए हैं। आरोपी होती लाल पुत्र हाकिम सिंह, ग्राम बिलाई पुरा, थाना निबोहरा का निवासी है।
थाना निबोहरा में दर्ज मामले के अनुसार, वादिया मुकदमा का आरोप था कि उसका अपने पति व ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न आदि धाराओं का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।
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आरोपी पति पूर्व में समझौता कर वादिया को अपने साथ घर ले आया था। कुछ दिनों तक सब ठीक रखने के बाद वह वादिया पर पूर्व में दर्ज मुकदमा वापस लेने और तलाक देने का दबाव बनाने लगा।
इसी दौरान वादिया गर्भवती हो गई। आरोप है कि मुकदमा वापस न लेने पर आरोपी पति और उसके परिजनों ने वादिया के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके चलते उसका गर्भपात हो गया।
अदालत में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान वादिया की अधिवक्ता बबीना शांत ने अपराध की गंभीरता, विश्वासघात और पीड़िता के साथ हुए अमानवीय कृत्य का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और वादिया पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी पति होती लाल का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
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