आगरा।
आगरा की एक अदालत ने दुराचार के मामले में एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है।
अदालत ने मामले के आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी करते हुए, झूठा मुकदमा दर्ज कराने और अदालत में गवाही से मुकरने के कारण पीड़िता और उसके पति के खिलाफ ही विधिक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
अपर जिला जज (एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।
यह मामला थाना ताजगंज क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2020 में एक महिला ने अपने पड़ोसी पवन कुमार शर्मा (पुत्र अंगद प्रसाद शर्मा, निवासी ग्राम बगदा) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने उसे अपने प्रेमजाल में फंसाकर उसके साथ जबरन दुराचार किया और उसकी अश्लील वीडियो बना ली।
इसके बाद आरोपी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करने लगा और उससे दो लाख रुपये ऐंठ लिए।
आरोप यह भी था कि आरोपी ने वे अश्लील फोटो और वीडियो अपने ताऊ के लड़के को भी भेज दिए थे और वह महिला पर महीने में दो-तीन बार मिलने का दबाव बनाता था।

मामले के विचारण के दौरान पीड़िता और उसके पति सहित कुल चार गवाह न्यायालय के समक्ष पेश हुए। विवेचना के समय ही पीड़िता ने अपनी अंदरूनी चिकित्सकीय जांच (मेडिकल परीक्षण) कराने से साफ इनकार कर दिया था।
जब अदालत में गवाही की बारी आई, तो पीड़िता और उसका पति अपने पुराने बयानों से पूरी तरह मुकर गए।
पीड़िता ने अदालत में स्वीकार किया कि आरोपी और उसके पति के बीच घर की नाली को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, इसी रंजिश के कारण उसने यह मुकदमा दर्ज कराया था।
जब अदालत ने उससे मजिस्ट्रेट के समक्ष पूर्व में दिए गए उन बयानों के बारे में पूछा जिनमें उसने दुराचार की पुष्टि की थी, तो उसने कहा कि वे बयान उसने दरोगा जी के दबाव और कहने पर दिए थे।
न्यायालय ने पाया कि पीड़िता और उसके पति ने कानून का दुरुपयोग करते हुए झूठा मुकदमा दर्ज कराया और अदालत का समय बर्बाद किया।
इस पर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नाहर सिंह तोमर ने कड़ी आपत्ति जताई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के विरोध को स्वीकार करते हुए आरोपी पवन कुमार शर्मा को ससम्मान दोषमुक्त कर दिया, और साथ ही झूठी गवाही व धोखाधड़ी के मामले में पीड़िता तथा उसके पति के विरुद्ध पृथक-पृथक मुकदमा दर्ज कर विधिक कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।
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