आगरा ।
आगरा में पांच लाख रुपये के चेक डिसऑनर के एक मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त न्यायालय संख्या 3 के न्यायिक अधिकारी माननीय महेश नौटियाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी शिशिर चौधरी को मुकदमे के विचारण हेतु अदालत में पेश होने के लिए तलब किया है।
यह आदेश वादी के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर जारी किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा निवासी सेवानिवृत्त थानाध्यक्ष सूर्यकांत द्विवेदी और आरोपी शिशिर चौधरी के बीच लंबे समय से मित्रता थी।
विपक्षी शिशिर चौधरी प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करता है। उसने जमीन खरीदने की आवश्यकता बताकर सूर्यकांत द्विवेदी से छह लाख रुपये उधार लिए थे। कुछ समय बीतने के बाद आरोपी ने एक लाख रुपये वापस कर दिए, लेकिन शेष पांच लाख रुपये की राशि बकाया थी।
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जब वादी ने अपनी बाकी रकम का तगादा किया, तो शिशिर चौधरी ने पांच लाख रुपये का एक चेक उन्हें सौंपा। वादी ने जब उक्त चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया, तो वह अपर्याप्त धनराशि या अन्य तकनीकी कारणों से बाउंस हो गया।
इसके बाद वादी ने अपने अधिवक्ता गिरधारी लाल चौरसिया के माध्यम से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन रकम वापस न मिलने पर अदालत की शरण ली।
न्यायालय ने वादी के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने और संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद आरोपी के विरुद्ध प्रथम दृष्टया मामला पाते हुए उसे समन जारी करने का आदेश दिया। अब आरोपी को निर्धारित तिथि पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।
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