विरोधाभासी बयानों और मेडिकल साक्ष्य न होने पर एडीजे फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने सुनाया फैसला
आगरा।
स्थानीय एडीजे फास्ट-ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश माननीय नीरज श्रीवास्तव की अदालत ने सास और पत्नी के साथ मारपीट तथा दुराचार के प्रयास के एक गंभीर मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है।
न्यायालय ने पाया कि मामले में गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास था और जांच के दौरान पुलिस के कहने के बावजूद पीड़िताओं ने अपना चिकित्सीय (मेडिकल) परीक्षण नहीं कराया था ।
थाना न्यू आगरा में दर्ज मुकदमे के अनुसार, नगला पदी निवासी वादिया की पुत्री का विवाह 20 नवंबर 2015 को बनवारी लाल राठौर (पुत्र बाबू लाल) के साथ हुआ था।
वादिया का आरोप था कि शादी के बाद से ही आरोपी अपनी पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करता था।
मारपीट कर घर से निकाले जाने के बाद से पीड़िता अपने मायके में ही रह रही थी और उसने आरोपी पति के खिलाफ अदालत में दहेज उत्पीड़न व तलाक का मुकदमा भी दायर कर रखा था।
दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 30 मार्च 2018 की रात करीब 9 बजे आरोपी दामाद वादिया के घर में घुस आया। आरोप था कि उसने अपनी पत्नी के साथ मारपीट कर दुराचार का प्रयास किया।
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जब सास (वादिया) बेटी की चीख सुनकर उसे बचाने आई, तो दामाद ने उसे भी नीचे गिराकर उसके साथ दुराचार का प्रयास किया।
इसके अतिरिक्त, अलमारी से 25 हजार रुपये निकालने और बाद में 4 अप्रैल 2018 को ससुर को तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में वादिया, उसकी पुत्री, विवेचक श्री कृष्ण उपाध्याय और उपनिरीक्षक रतन लाल की गवाही दर्ज की गई।
विवेचक ने अदालत में इस बात की पुष्टि की कि उनके बार-बार कहने के बाद भी दोनों मां-बेटी ने अपना मेडिकल परीक्षण नहीं कराया।
इसके अलावा, घटना स्थल और पूरे घटनाक्रम को लेकर मां-बेटी दोनों के बयानों में भी काफी भिन्नता और विरोधाभास सामने आया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज कुमार शर्मा और प्रमेंद्र त्यागी ने अदालत में मजबूती से तर्क दिया कि पति-पत्नी के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद के कारण आरोपी को रंजिशन इस झूठे मुकदमे में फंसाया गया है।
अदालत ने बचाव पक्ष के इन तर्कों से सहमति जताते हुए और मेडिकल व ठोस साक्ष्य के अभाव को देखते हुए आरोपी बनवारी लाल राठौर को दोषमुक्त करार दिया।
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