आगरा।
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और रेलवे स्टाफ के बीच हुआ विवाद अब कानूनी रूप ले चुका है।
विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) माननीय शिव कुमार की अदालत ने जीआरपी आगरा कैंट के एएसआई मेघराज मीना के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया है।
अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सहायक स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर और 8-10 अन्य रेलवे कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दलित उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।
वादी एएसआई मेघराज मीना के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. रवि अरोरा द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, घटना 12 जुलाई 2026 की है। एएसआई मेघराज मीना उस दिन आगरा कैंट स्टेशन पर बतौर बैच इंचार्ज तैनात थे। उनके साथ एएसआई बी.के. मीना, हेड कांस्टेबल बादाम सिंह और कांस्टेबल जितेंद्र सिंह भी ड्यूटी पर थे।
रात करीब 10:50 बजे हीराकुंड एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आकर रुकी। जैसे ही ट्रेन चलने को हुई, अचानक चेन पुलिंग हो गई।
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ट्रेन चालक के हॉर्न बजाने पर जब जीआरपी टीम जांच के लिए गई, तो देखा कि एक लड़का और लड़की ट्रेन में चढ़ रहे थे। जीआरपी कर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया और थाने ले जाने लगे।
आरोप है कि इसी दौरान सहायक स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर वहां आ गए और पकड़े गए लोगों को छोड़ने का दबाव बनाने लगे।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों के मना करने पर नरेंद्र सिंह चाहर भड़क गए और अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे।
जब एएसआई मेघराज मीना मौके पर पहुंचे, तो उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि नरेंद्र सिंह चाहर और अन्य 8-10 रेलवे कर्मियों ने जीआरपी कर्मियों के साथ मारपीट और हाथापाई की, उनकी वर्दी फाड़ दी और चेन पुलिंग के आरोपियों को जबरन छुड़ा ले गए।
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वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. रवि अरोरा की दलीलों और तथ्यों पर विचार करने के बाद, विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष जीआरपी आगरा कैंट को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने आदेश दिया है कि नरेंद्र सिंह चाहर एवं अन्य के विरुद्ध बीएनएस की धारा 132, 221, 115(2), 190, 351(2)(3), 352 तथा एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत अविलंब मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना की जाए।
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