आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने और 11 आपराधिक मामलों के इतिहास वाले अभियुक्त नौशाद को बड़ी राहत दी है।
न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने मामले की परिस्थितियों और कानूनी तर्कों को देखते हुए आरोपी की सशर्त जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है।
मामले की संदिग्धता पर कोर्ट का ध्यान:
सुनवाई के दौरान याची (अभियुक्त) के अधिवक्ता बी. डी. निषाद भूपेंद्र ने कोर्ट में सशक्त पैरवी करते हुए पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष के मुख्य तर्क निम्नलिखित थे:
* किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं: पुलिस का दावा है कि उन पर फायरिंग की गई, लेकिन इस कथित मुठभेड़ में किसी भी पुलिसकर्मी को खरोंच तक नहीं आई।
Also Read – बीएलओ की मनमानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार और चुनाव आयोग से मांगी रिपोर्ट

* क्रॉस फायरिंग का दावा संदिग्ध: पुलिस के अनुसार जवाबी कार्रवाई में मुल्जिम के पैर में गोली लगी, जिसे अधिवक्ता ने पूरी तरह असत्य और मनगढ़ंत करार दिया।
* आपराधिक इतिहास का खुलासा: अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची पर लगे सभी 11 पुराने आपराधिक मुकदमों का विवरण स्पष्ट कर दिया गया है और उसे वर्तमान मामले में केवल रंजिशवश झूठा फंसाया गया है।
न्यायालय का निर्णय:
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि घटना की प्रकृति और पुलिस द्वारा पेश किए गए तथ्य संदिग्ध प्रतीत होते हैं।
कोर्ट ने माना कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर किसी को अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता, विशेषकर तब जब वर्तमान केस के साक्ष्य कमजोर हों।
Also Read – निजी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ‘मेडिकल बोर्ड’ की रिपोर्ट को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट का आदेश:
न्यायमूर्ति ने अभियुक्त नौशाद को कुछ कड़े प्रतिबंधों और शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin
- बिना अपमान के इरादे के केवल जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल एससी-एसटी एक्ट के तहत अपराध नहीं – इलाहाबाद हाईकोर्ट - August 22, 2026
- राज्यपाल की समय से पहले रिहाई की शक्ति मनमानी नहीं, अदालत की अनुमति के बिना आदेश रद्द - August 18, 2026
- उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एपीओ भर्ती-2025 में आरक्षण विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती - August 18, 2026




