आगरा।
नौसेना से सेवानिवृत्त कर्मी की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
न्यायालय ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां आपस में न जुड़ने और घटना का कोई स्वतंत्र गवाह न होने के आधार पर मृतक के आरोपी दामाद और उसके एक साथी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना सिकंदरा क्षेत्र का है। वादिया श्रीमती सोनी उर्फ जेनित मसीह ने थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पिता एडवर्ड मसीह उर्फ सुरेश नौसेना से सेवानिवृत्त थे और किराए पर ऑटो चलाते थे।
घटना वाले दिन 26 फरवरी 2019 की शाम करीब 5:30 बजे वह घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं आए। तलाश करने पर अगले दिन सेक्टर 11 के एक निर्जन स्थान पर ऑटो में उनका खून से लथपथ शव मिला था। उनकी हत्या ईंट और स्टंप से प्रहार करके की गई थी।

वादिया ने पुलिस को बताया था कि उसके पिता उसके पति आमिर (पुत्र आजाद खान, निवासी लाल डिग्गी नगला मोहन, थाना शाहगंज, स्थायी निवासी बेसन बस्ती, खातीपाड़ा, थाना लोहामंडी) के साथ घर से गए थे।
इसी आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मृतक के दामाद आमिर और उसके साथी लक्ष्य बिंद्रा (पुत्र गुरुदीप सिंह बिंद्रा, निवासी मालवीय कुंज तोता का ताल, थाना लोहामंडी) को हिरासत में लिया और एडवर्ड मसीह की हत्या के आरोप में जेल भेज दिया था।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मृतक की पुत्री सहित कुल 13 गवाह अदालत में पेश किए गए।
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से मृतक के दामाद के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने पैरवी की।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां आपस में नहीं जुड़ रही हैं और घटना को साबित करने के लिए कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार किया।
एडीजे माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी आमिर और उसके साथी लक्ष्य बिंद्रा को हत्या के आरोपों से बरी करने के आदेश दिए।
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