सांसद कंगना रनौत के खिलाफ राजद्रोह व किसानों के अपमान मामले में तीखी बहस, 4 अगस्त को आदेश सुनाएगा न्यायालय

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हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ राजद्रोह और किसानों के अपमान से जुड़े मामले में अदालत में दोनों पक्षों की ओर से करीब एक घंटे तक लंबी और तीखी कानूनी बहस हुई।

न्यायालय ने सभी दलीलें सुनने के बाद मामले में आदेश पारित करने के लिए 4 अगस्त 2026 की तिथि निर्धारित की है।

अदालत में सुनवाई के दौरान सांसद कंगना रनौत की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।

दूसरी तरफ, वादी और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह और बी.एस. फौजदार सहित कई अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष मजबूती से कानूनी दलीलें पेश कीं।

वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष यह महत्वपूर्ण तर्क रखा कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई जांच आख्या पूरी तरह से अधूरी है और इसके आधार पर मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती।

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अधिवक्ताओं का आरोप था कि पुलिस ने इस प्रकरण में विपक्षी (कंगना रनौत) का व्यक्तिगत रूप से बयान दर्ज नहीं किया है, बल्कि उनकी अधिवक्ता का बयान लेकर ही जांच रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है।

वादी पक्ष ने मांग की कि ऐसी स्थिति में न्यायालय को अधिकार है कि वह धारा 225 (1) के तहत स्वयं विपक्षी को तलब करे और उनका बयान दर्ज करे।

सुनवाई के दौरान वादी रमाशंकर शर्मा ने अदालत का ध्यान पूर्व के आदेशों की ओर भी आकृष्ट किया। उन्होंने दलील दी कि 6 मई 2025 को जब निचली अदालत द्वारा यह वाद खारिज किया गया था, तब रिवीजन कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया था।

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रिवीजन कोर्ट ने अपने 11 सितंबर 2025 के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि अवर न्यायालय ने पुलिस की अधूरी जांच आख्या को नजरअंदाज करते हुए मामले को खारिज कर दिया था।

इसी महत्वपूर्ण बिंदु को आधार बनाते हुए रिवीजन कोर्ट ने याचिका स्वीकार की थी और निचली अदालत को मामले की पुनः विस्तृत सुनवाई करके विधि सम्मत आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे।

अब दोनों पक्षों के वकीलों की विस्तारपूर्वक बहस सुनने के उपरांत न्यायालय ने मामले को आदेश के लिए 4 अगस्त की तिथि पर नियत कर दिया है।

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विवेक कुमार जैन
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