आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता का इलाज खर्च और मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना देने का आदेश दिया है।
कंपनी ने ‘मधुमेह’ (Diabetes) छिपाने का आधार बनाकर कैंसर के इलाज का क्लेम खारिज कर दिया था, जिसे आयोग ने अनुचित माना।
क्या था मामला ?
सिकंदरा निवासी अनिल कुमार कुलश्रेष्ठ ने 2019 में पहले बजाज अलियांज से पॉलिसी ली थी, जिसे बाद में आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस में पोर्ट करा लिया था।
2022 में उन्हें मुंह के कैंसर की पुष्टि हुई, जिसके बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई। इलाज में कुल 8.70 लाख रुपये खर्च हुए।

जब पीड़ित ने क्लेम दाखिल किया, तो बीमा कंपनी ने यह तर्क देते हुए उसे खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय अनिल कुमार ने अपनी मधुमेह की बीमारी की जानकारी छिपाई थी।
आयोग का सख्त फैसला:
आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष और सदस्य पारुल कौशिक ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि कंपनी का क्लेम रोकना गलत था।
आयोग ने कंपनी को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
* इलाज की राशि: पीड़ित को इलाज में खर्च हुए 8.70 लाख रुपये 45 दिन के भीतर अदा करें।
* हर्जाना: मानसिक कष्ट और कानूनी खर्च (वाद व्यय) के रूप में 10 हजार रुपये अलग से देने होंगे।
* समय सीमा: यदि निर्धारित 45 दिनों में भुगतान नहीं किया गया, तो कंपनी को ब्याज भी देना पड़ सकता है।
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