आगरा।
जनपद की एक विशेष अदालत ने लूट, हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र के एक पुराने मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।
विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावी क्षेत्र माननीय विकास गोयल ने साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपियों को बत्तीस वर्ष तक चले लंबे विचारण के बाद बरी करने का आदेश दिया।
इस मामले में गाजियाबाद निवासी नसीम उर्फ पलटू और इखलाख उर्फ मुन्ना को आरोपी बनाया गया था।
प्रकरण के अनुसार, थाना मंटोला में २६ नवंबर १९९३ को मोहम्मद जुबेर ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप था कि उनका भाई सलामुद्दीन गाजियाबाद में पशु बेचकर एक लाख साठ हजार रुपये एक अटैची में लेकर घर लौट रहा था। देर रात्रि बदमाशों ने लूट के इरादे से उन पर छुरी और तमंचे से हमला कर अटैची छीन ली थी।
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शोर मचने पर मोहल्ले वालों ने पीछा करके दो आरोपियों यामीन और अनिल शर्मा को मौके पर ही लूटी गई अटैची और हथियारों के साथ दबोच लिया था।
बाद में पुलिस ने विवेचना के दौरान नसीम और इखलाख को भी इस अपराध में संलिप्त बताते हुए आरोपित किया था।
न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पकड़े गए मुख्य आरोपियों में से यामीन की मृत्यु हो गई, जबकि अनिल शर्मा के न्यायालय में हाजिर न होने पर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई थी।
तीन दशकों से अधिक समय तक चली इस कानूनी कार्यवाही के दौरान वादी मुकदमा मोहम्मद जुबेर और मुख्य पीड़ित सलामुद्दीन की भी मृत्यु हो गई, जिस कारण उनकी गवाही दर्ज नहीं हो सकी।
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मामले में वादी के भाई इकबाल की गवाही महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया कि घटना के समय केवल यामीन और अनिल शर्मा ही मौके पर थे और उन्हें ही पकड़ा गया था।
उन्होंने नसीम और इखलाख को निर्दोष बताया। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सिंह के तर्कों और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और चिकित्सक के भी बयान दर्ज किए गए थे।
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