आगरा।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या 6) माननीय हर्ष वर्धन की अदालत ने वर्ष 2023 के बहुचर्चित हत्याकांड और आयुध अधिनियम के मामले में पुलिस की लचर विवेचना और साक्ष्यों के अभाव के आधार पर चारों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है।
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।
बरी होने वाले आरोपियों में कालू खान उर्फ शारिक व अजहर खान (दोनों पुत्र शाहिद खान, निवासी बिंदा भगत की बगीची, विभव नगर, ताजगंज), अमन खान (पुत्र हामिद खान, निवासी शहीद नगर, सदर) और अजहर खान (पुत्र अब्दुल गफ्फार खान, निवासी बिंदा भगत की बगीची, ताजगंज) शामिल हैं।
अभियोजन के अनुसार, वादी किशन सिंह ने थाना ताजगंज में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 14 जनवरी 2023 की रात करीब 10 बजे उनके घर के पास स्थित मंदिर पर विवाद हुआ था।
शोर सुनकर उनका 35 वर्षीय भतीजा सतीश वहां पहुंचा, जहां आरोपियों ने चाकू से प्रहार कर उसकी निर्मम हत्या कर दी और शव को फेंककर फरार हो गए।
मामले में अभियोजन की ओर से मृतक के चाचा, बहन और चचेरे भाई सहित कुल नौ गवाह अदालत में पेश किए गए।
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वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुराग सिंह ने अदालत में दलील दी कि पुलिस विवेचना में कई गंभीर लापरवाहियां बरती गईं।
उन्होंने तर्क रखा कि आरोपी कालू खान की निशानदेही पर सर सैय्यद पार्क जैसे सार्वजनिक स्थान से कथित चाकू की बरामदगी दिखाई गई, लेकिन उसका कोई भी स्वतंत्र साक्षी नहीं बनाया गया और न ही केस डायरी में बरामदगी का समय दर्ज किया गया।
इसके अलावा बरामद चाकू को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) तक नहीं भेजा गया।
अधिवक्ता ने यह भी रेखांकित किया कि जिस स्थान से शव बरामद हुआ, वहां आसपास के स्थानीय निवासियों को न तो गवाह बनाया गया और न उनके बयान लिए गए।
साथ ही घटना की प्राथमिकी भी करीब 14 घंटे के विलंब से दर्ज कराई गई थी। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने और बचाव पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए चारों आरोपियों को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए।
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