आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का कड़ा फैसला: क्लेम निरस्त करना सेवा में कमी, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर जुर्माना

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, प्रथम, आगरा ने चिकित्सा क्लेम को मनमाने ढंग से निरस्त करने के मामले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण का दोषी ठहराया है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह परिवादी को इलाज के खर्च की भरपाई सहित मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय का भुगतान करे।

मामले के अनुसार, अकोला, किरावली निवासी कुमर प्रताप सिंह ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से एक हेल्थ पॉलिसी खरीदी थी, जिसके अंतर्गत उनका पूरा परिवार कवर था।

जनवरी 2022 में उनकी 14 वर्षीय पुत्री प्रेरणा डेंगू बुखार से पीड़ित होने के कारण चाहर हॉस्पिटल, आगरा में भर्ती हुईं, जहां आईसीयू और सामान्य वार्ड में उनके उपचार पर कुल 74,440/- रुपये खर्च हुए।

अस्पताल में भर्ती होने की सूचना तुरंत टोल-फ्री नंबर पर दिए जाने और सभी मूल प्रपत्र व बिल समय पर संजय प्लेस स्थित शाखा कार्यालय में जमा करने के बावजूद बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि बिलों में विसंगतियां हैं तथा आईसीयू स्टे के साक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं।

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इसके बाद उपभोक्ता ने अधिवक्ता राज कुमार चाहर के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में परिवाद संख्या 161/2022 दाखिल किया।

सुनवाई के दौरान आयोग ने पत्रावली पर उपलब्ध पर्चों, बिलों और डिस्चार्ज समरी का गहनता से परीक्षण किया।

आयोग ने पाया कि इलाज और बिलों में ऐसी कोई विसंगति नहीं थी जिसके आधार पर क्लेम खारिज किया जाए, न ही बीमा पॉलिसी की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ था।

आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी ने मनमाने तरीके से क्लेम निरस्त किया, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में गंभीर कमी है।

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आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह निर्णय की तिथि से 45 दिनों के भीतर 74,440/- रुपये की धनराशि 4 फरवरी 2022 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ आयोग के खाते में डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) के माध्यम से जमा कराए।

इसके साथ ही मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति के रूप में 10,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये भी जमा करने का आदेश दिया गया है।

निर्धारित समय सीमा में भुगतान न करने पर बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।

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विवेक कुमार जैन
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