पति की हत्या कर लाश नाले में फेंकने वाले पति-पत्नी को आजीवन कारावास, अदालत ने लगाया जुर्माना

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

पति की हत्या करने, आपराधिक षड्यंत्र रचने और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को नाले में छिपाने के गंभीर मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।

विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) माननीय शिव कुमार ने आरोपी पति-पत्नी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर कुल 1 लाख 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

जानिये क्या था पूरा मामला ?

जैतपुर थाने में दर्ज मामले के अनुसार, वादिनी मुकदमा श्रीमती रूमा देवी ने 29 जून 2022 को थाने में एक शिकायती पत्र देकर अपने पति की हत्या का आरोप लगाया था।

तहरीर में बताया गया था कि ग्राम लोहन्ना चौराहा (थाना सिविल लाइंस, जिला इटावा) के निवासी चंटई, उसकी पत्नी श्रीमती सीमा और एक बाल अपचारी (नाबालिग) ने मिलकर उनके पति की बेरहमी से हत्या कर दी।

आरोपियों ने कानूनी कार्रवाई और सबूतों से बचने के लिए शव को एक नाले में फेंक कर छुपा दिया था।

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पुलिस कार्रवाई और जांच:

महिला की तहरीर पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी चंटई को उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, और उसकी निशानदेही पर मृतक का शव नाले से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।

घटना के अगले दिन पुलिस ने आरोपी की पत्नी सीमा और बाल अपचारी को भी हिरासत में ले लिया। नाबालिग आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया।

मामले की गंभीरता और पीड़ित पक्ष की पृष्ठभूमि को देखते हुए, विवेचना के दौरान 4 जुलाई 2022 को मुकदमे में दलित उत्पीड़न (एससी/एसटी एक्ट) की धाराएं भी बढ़ाई गई थीं।

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अदालत का फैसला:

मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मृत्युंजय सिंह ने दमदार पैरवी की।

उन्होंने अदालत के समक्ष वादिनी सहित अन्य गवाहों के बयान, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत कर आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की।

विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध पुख्ता सबूतों का अवलोकन करने के बाद आरोपी पति (चंटई) और पत्नी (सीमा) को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य नष्ट करने का दोषी पाया।

अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 1 लाख 12 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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विवेक कुमार जैन
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