आगरा ।
हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत तथा उनकी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी की ओर से अधिवक्ता एवं राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रमाशंकर शर्मा को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा गया है।
नोटिस में रमाशंकर शर्मा पर अदालत की कार्यवाही को गलत तरीके से पेश करने, भ्रामक खबरें फैलाने और पेशेवर छवि धूमिल करने के आरोप लगाए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर, नोटिस मिलने के बाद रमाशंकर शर्मा ने इसे मुकदमों से पीछे हटने का दबाव बनाने की एक कुत्सित चाल बताया है और इसकी शिकायत बार काउंसिल ऑफ इंडिया तथा सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में करने की बात कही है।
सांसद और उनकी अधिवक्ता का पक्ष:
सुप्रसिद्ध अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने नोटिस में कहा है कि वह वर्ष 2013 से देश की शीर्ष अदालत में वकालत कर रही हैं और उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा बेदाग रही है।
नोटिस के अनुसार, रमाशंकर शर्मा ने पूर्व में कंगना रनौत के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप था कि कंगना ने अगस्त 2024 में दिए गए बयानों में दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन करने वाले किसानों को कथित तौर पर हत्यारा और बलात्कारी कहा था तथा आजादी को लेकर भी विवादित टिप्पणी की थी।
अधिवक्ता चौधरी का कहना है कि उन्होंने इस मामले में 21 अप्रैल 2026 को अदालत में जवाब और लिखित तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मांगा था, जिस पर 30 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने कंगना रनौत के पक्ष में आदेश पारित किया।
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नोटिस में आरोप लगाया गया है कि रमाशंकर शर्मा ने इस कार्यवाही को विभिन्न टीवी चैनलों, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गलत ढंग से प्रसारित करवाया।
इनमें यह दावा किया गया कि कंगना की ओर से पेश हुईं वकील ने अदालत में हाथ जोड़कर माफी मांगी है।
अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने स्पष्ट किया है कि उस दिन उनकी कनिष्ठ (जूनियर) सहयोगी सुधा प्रधान अदालत में मौजूद थीं और कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में रहा था।
माफी मांगने जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। इस भ्रामक रिपोर्टिंग से समाज और कानूनी बिरादरी में उनकी तथा कंगना रनौत की छवि खराब हुई है, जो भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 के तहत मानहानि का गंभीर अपराध है।
नोटिस के माध्यम से मांग की गई है कि रमाशंकर शर्मा ऐसी तमाम भ्रामक रिपोर्टिंग को तुरंत रुकवाएं, विभिन्न मीडिया माध्यमों पर सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी करें और 15 दिनों के भीतर लिखित में आश्वासन दें। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ दीवानी एवं आपराधिक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा और बार एसोसिएशन का पलटवार:
इस कानूनी नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कहा कि यह केवल उन पर मुख्य मामले को वापस लेने का दबाव बनाने की एक कोशिश है।
उन्होंने पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि 21 अप्रैल 2026 को भी विपक्षी अधिवक्ता ने अदालत पर ही अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे कोर्ट ने नजरअंदाज कर दिया था। इसके बाद अब दबाव बनाने के लिए यह नोटिस भेजा गया है।
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सच्चाई बयां करते हुए श्री शर्मा ने दावा किया कि 30 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने जूनियर वकील सुधा प्रधान से पूछा था कि क्या उन्होंने 3 अप्रैल को दाखिल किए गए दस्तावेजों की प्रतियां वादी पक्ष (रमाशंकर शर्मा) को उपलब्ध कराई हैं?
इस पर जब जूनियर वकील कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं और न्यायालय ने उन्हें आदेश उल्लंघन पर टोकते हुए डांट लगाई, तो उन्होंने पूरी अदालत के सामने कई बार सॉरी सर कहकर माफी मांगी थी।
यही घटनाक्रम अखबारों और समाचार माध्यमों में प्रकाशित हुआ था। श्री शर्मा ने कहा कि रिपोर्टिंग करना मीडिया का काम है, उनका नहीं।
इस झूठे नोटिस से उनकी मानहानि हुई है, जिसकी शिकायत वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से करेंगे तथा दोनों महिला वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करेंगे।
अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश:
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कानूनी बिरादरी में गहरा रोष व्याप्त हो गया है।
रमाशंकर शर्मा की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुखवीर सिंह चौहान, दुर्गे विजय सिंह भैया, राजवीर सिंह, आई.डी. श्रीवास्तव, सुरेंद्र लाखन, नवीन वर्मा, आर.एस. मौर्य, रामदत्त दिवाकर, अनूप शर्मा, बी.एस. फौजदार, प्रीति कुमारी और प्रेम कुमार सहित तमाम वकीलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में दो पक्षों के वकीलों द्वारा अपनी-अपनी दलीलें पेश करना एक सामान्य और स्थापित व्यवस्था है।
इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि एक वकील अपने मुवक्किल के प्रभाव का इस्तेमाल कर दूसरे वकील को ही धमकी भरा नोटिस भेज रहा है।
अगर इस तरह से वकीलों को डराने और न्याय प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया गया, तो पूरी कानूनी व्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कंगना रनौत और उनकी अधिवक्ता ने इस कृत्य के लिए माफी नहीं मांगी, तो देश भर के अधिवक्ताओं को एकजुट कर एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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