आगरा।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से फर्जी कागजातों के आधार पर एक करोड़ तीस लाख रुपये का लोन लेने और बैंक के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) माननीय शारिब अली ने मैसर्स एम.एस. बर्तन भंडार के साझीदारों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के आदेश थानाध्यक्ष हरी पर्वत को दिए हैं।
मामले में नामजद किए गए आरोपियों में फर्म के साझीदार मनोज कुमार (निवासी सरस्वती पैलेस, देवरी रोड, आगरा), श्रीमती स्नेह लता, रवि कुमार जैन, श्रीमती पुष्पा देवी और अजय जैन (निवासी एफ-197, फेज 2, ट्रांस यमुना कॉलोनी, आगरा) शामिल हैं।
जानिये क्या है पूरा मामला ?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संजय प्लेस शाखा के डिप्टी मैनेजर अरविंद कुमार ने बैंक के अधिवक्ता धीरज कुमार के माध्यम से अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, आरोपियों ने 26 मार्च 2019 को मैसर्स एम.एस. बर्तन भंडार नाम की एक पार्टनरशिप फर्म बनाई थी और व्यवसाय के नाम पर बैंक से एक करोड़ तीस लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया था।
इस लोन के एवज में आरोपियों ने अपनी दो अचल संपत्तियां और अन्य दस्तावेज बैंक के पास बंधक रखे थे।
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जांच में खुली धोखाधड़ी की पोल:
लोन लेने के बाद जब आरोपियों ने किस्तें जमा नहीं कीं, तो खाता दो बार एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) हो गया। इसके बाद जब बैंक प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू की, तो बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अमर कुंज, ट्रांस यमुना कॉलोनी, फेज 2 स्थित प्लॉट नंबर 35 को एसबीआई में बंधक रखने से पहले ही केनरा बैंक में भी बंधक रखकर लोन ले रखा था।
केनरा बैंक का भुगतान न करने पर उस बैंक ने 5 दिसंबर 2019 को ही उक्त संपत्ति को नीलाम कर दिया था। इसके अलावा, एसबीआई में बंधक रखी गई दूसरी संपत्ति पर भी इलाहाबाद बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा का लोन बकाया पाया गया।
बैंक की जांच में पाया गया कि जिस बर्तन कारोबार के नाम पर करोड़ों का लोन लिया गया था, वहां बर्तनों का कोई स्टॉक ही मौजूद नहीं था। यही नहीं, एक साझीदार ने लोन की राशि में से तीस लाख रुपये सीधे अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर कर लिए थे।
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साथ ही, एक अन्य साझीदार के पहचान दस्तावेजों (पहचान पत्र एवं टैक्स संबंधी दस्तावेजों) में दर्ज जन्मतिथि में भी भारी अंतर पाया गया।
अदालत का आदेश:
इन तमाम गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के कारण 30 अगस्त 2025 को बैंक की फ्रॉड आइडेंटिफिकेशन कमेटी (एफआईसी) द्वारा इस खाते को आधिकारिक रूप से ‘फ्रॉड’ घोषित कर दिया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान बैंक के अधिवक्ता के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों को सही पाते हुए, सीजेएम माननीय शारिब अली ने आरोपियों के कृत्य को गंभीर मानते हुए हरी पर्वत थाना पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर मामले की गहनता से विवेचना करने के आदेश जारी किए हैं।
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