आगरा।
अपने ही चौदह वर्षीय पुत्र की गोली मारकर निर्मम हत्या करने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय मृदुल दुबे ने आरोपी पिता धीरज को जघन्य अपराध का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और तीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
प्रकरण थाना सदर क्षेत्र का है, जहाँ उखर्रा रोड स्थित रामजी विहार कॉलोनी में यह वारदात हुई थी। मूल रूप से फतेहाबाद के बाबरपुर निवासी आरोपी धीरज पूर्व में भारतीय सेना में कार्यरत था।
अत्यधिक शराब पीने की लत के कारण उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया था और घर पर रहकर दिन-रात नशे में धुत रहता था।
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घटना 21 अगस्त 2024 की है, जब धीरज शराब पीकर उत्पात मचा रहा था। उसकी पत्नी श्रीमती सुधा और बड़े पुत्र विवेक ने जब इसका विरोध किया, तो आरोपी ने आवेश में आकर अपनी लाइसेंसी पिस्टल से विवेक के पेट में गोली मार दी।
घायल किशोर को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था और उसने अपनी पिस्टल यमुना नदी में फेंक दी थी।
पुलिस ने आरोपी को 23 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया। विवेचक ने पीएसी की फ्लड यूनिट की मदद से यमुना नदी में सर्च ऑपरेशन चलाकर पिस्टल बरामद करने का प्रयास किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के साले मुकेश, उसकी पत्नी सुधा और छोटे पुत्र नितिन सहित अन्य गवाहों को पेश किया।
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हत्या की चश्मदीद गवाह आरोपी की पत्नी और उसके छोटे बेटे की गवाही इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई।
न्यायालय ने गवाहों के बयानों, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रवीण कुमार पाराशर के तर्कों के आधार पर धीरज को दोषी माना।
अदालत ने टिप्पणी की कि पिता द्वारा अपने ही पुत्र की हत्या करना एक जघन्य कृत्य है, जिसके लिए उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया जाना उचित है।
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