आगरा।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, खंदारी परिसर स्थित आई.बी.एस. शिक्षण संस्थान के प्रोफेसर गौतम बिहारी जैसवार (पुत्र लाल बिहारी जैसवार, निवासी राम मोहन नगर, सिकन्दरा, आगरा) को तगड़ा झटका लगा है।
जिला और सत्र न्यायाधीश माननीय संजय कुमार मलिक ने शोध छात्रा से ‘शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण’ एवं अन्य आरोपों में गिरफ्तार आरोपी प्रोफेसर की जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज करने का आदेश दिया।प्रोफेसर जैसवार 31 अक्टूबर से जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
मुख्य आरोप:
थाना न्यू आगरा में दर्ज इस चर्चित मामले में, वादनी (शोध छात्रा) का आरोप है कि वह प्रोफेसर जैसवार के अधीन पीएचडी कर रही थी। उसने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने पिछले दो वर्षों से शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया।
* प्रथम दुराचार: भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, मुंबई में एक सेमिनार में भाग लेने के दौरान, प्रोफेसर ने पहली बार वादनी के कमरे में घुसकर दुराचार किया।
* अन्य स्थानों पर शोषण: खजुराहो और बरसाना के होटलों में भी ‘नाइट स्टे’ के दौरान दुराचार किए जाने का आरोप है।

* कैंपस में बुलाना: आरोप है कि प्रोफेसर जैसवार उसे रविवार जैसे अवकाश के दिन भी (2 बजे से 6 बजे के बीच) खंदारी कैंपस स्थित अपने कार्यालय में बुलाते थे।
* सबूत नष्ट करने का प्रयास: 26 अक्टूबर 2025 को, शादी का दबाव बनाने पर आरोपी ने वादनी से हाथापाई की, तथा सबूत/चैट डिलीट करने के उद्देश्य से उसका मोबाइल झपटकर तोड़ने की कोशिश की और जान से मारने की धमकी भी दी।
भावनात्मक शोषण का आरोप:
वादनी ने अपने बयान में कहा कि वर्ष 2022 में अपनी बहन के देहांत के कारण वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो गई थी। प्रोफेसर ने इस स्थिति का लाभ उठाकर उसका ब्रेन वॉश किया, यह कहते हुए कि वह उसे पसंद करते हैं और अपनी पत्नी से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नौकरी लगवाने और करियर बनवाने का भी वादा किया था।

शादी से साफ मना करने और करियर बर्बाद करने की धमकी देने के बाद वादनी ने तहरीर दी, जिस पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपी प्रोफेसर को प्रयागराज से गिरफ्तार कर 31 अक्टूबर को जेल भेजा गया था।
सत्र न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य और जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राधाकृष्ण गुप्ता के तर्कों पर सहमति जताते हुए आरोपी प्रोफेसर की जमानत याचिका को खारिज करने का आदेश दिया।
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