नई दिल्ली।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ताज महल और ताज ट्रेपेजियम जोन के पर्यावरण संरक्षण से संबंधित 42 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रिट याचिका संख्या 13381/1984 का औपचारिक रूप से समापन कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 11 मार्च 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण से पीछे हटना नहीं है, बल्कि निगरानी को और अधिक व्यवस्थित और सुगठित बनाने की एक प्रक्रिया है।
विरासत संरक्षण की लंबी यात्रा:
विख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता एम.सी. मेहता द्वारा वर्ष 1984 में दायर इस याचिका का मुख्य उद्देश्य ताज महल के सफेद संगमरमर को प्रदूषण के कारण होने वाली क्षति से बचाना था।
पिछले चार दशकों में इस मुकदमे ने न केवल ताज महल की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि देश के पर्यावरण कानून में ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान करे’ जैसे बड़े सिद्धांतों को स्थापित किया। वर्तमान में इस एकल याचिका के भीतर 150 से अधिक विविध आवेदन लंबित थे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया जटिल हो रही थी।

चार नई स्वतः संज्ञान याचिकाओं का होगा गठन:
न्यायालय ने पुरानी याचिका के स्थान पर विषय-वार चार नई स्वतः संज्ञान रिट याचिकाएं पंजीकृत करने के निर्देश दिए हैं।
ये नई याचिकाएं क्रमशः टीटीजेड के विजन दस्तावेज, वृक्ष एवं हरित आवरण की सुरक्षा, उद्योगों के विनियमन और जल निकायों व सीवेज प्रबंधन पर केंद्रित होंगी। इस विभाजन से न्यायालय प्रत्येक मुद्दे पर विशेष और प्रभावी ध्यान केंद्रित कर सकेगा।
लंबित मामलों के लिए समय सीमा निर्धारित:
पुरानी याचिका में लंबित आवेदनों के निपटान के लिए 15 मई 2026 तक की समय सीमा तय की गई है। इस दौरान संबंधित अधिवक्ताओं को यह स्पष्ट करना होगा कि उनका मामला किस नई श्रेणी में आता है या वह निष्प्रभावी हो चुका है।
साथ ही, पेड़ काटने या स्थानांतरित करने से संबंधित आवेदनों के लिए 30 अप्रैल 2026 तक एक विशेष प्रारूप चार्ट न्यायमित्र को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
यमुना और यातायात जैसे अनसुलझे मुद्दों पर रहेगी नजर:
आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा उठाए गए यमुना प्रदूषण और भारी वाहनों के शहर के भीतर प्रवेश जैसे मुद्दों को भी नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
यमुना में गिरने वाले नालों को टैप करने और आगरा से बाहर जाने वाले वाणिज्यिक वाहनों को डायवर्ट करने जैसे विषय अब संबंधित नई याचिकाओं के माध्यम से सुने जाएंगे।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में दिए गए सभी आदेश भविष्य में भी बाध्यकारी बने रहेंगे।
सुदृढ़ न्यायिक ढांचे की शुरुआत:
विधिक विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, इस आदेश से ताज ट्रेपेजियम जोन की निगरानी का एक नया अध्याय शुरू होगा।
अधिवक्ता के.सी. जैन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि निगरानी अब पहले से अधिक केंद्रित होगी। उनके अनुसार, राज्य सरकार को अब टीटीजेड में गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना और एग्रोफोरेस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए नए सिरे से सशक्त पैरवी करनी चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र का विकास भी सुनिश्चित हो सके।
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