विवेचना में लापरवाही पर सहायक पुलिस आयुक्त के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश, कोर्ट ने कहा- आरोपियों से मिले होने का अंदेशा

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आगरा ।

आगरा की एक विशेष अदालत ने सामूहिक दुराचार, पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न जैसे गंभीर मामले की जांच में घोर लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाया है।

विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट माननीय शिव कुमार ने पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) शमशाबाद इमरान अहमद के खिलाफ विभागीय जांच कराने और उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देशित किया है कि भविष्य में उक्त अधिकारी को किसी भी मुकदमे की विवेचना न सौंपी जाए।

विशेष न्यायाधीश ने पुलिस आयुक्त को भेजे गए पत्र में बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि विवेचक का आचरण यह दर्शाता है कि वह इस मामले के अभियुक्तों से मिले हुए हैं और उन्हें अनुचित व अवैध लाभ पहुंचा रहे हैं।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, थाना इरादत नगर में 17 मार्च 2026 को सामूहिक दुराचार, पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न की धाराओं के तहत अपराध संख्या 31/26 पर एक मुकदमा दर्ज किया गया था।

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इस संवेदनशील मामले की विवेचना एसीपी शमशाबाद इमरान अहमद द्वारा की जा रही थी। विधिक प्रावधानों के अनुसार, ऐसे गंभीर मामलों में दो महीने के भीतर विवेचना पूरी कर अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करना अनिवार्य होता है।

अदालत ने संज्ञान लिया कि तय समय बीत जाने के बाद भी विवेचक ने न तो कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई की।

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विशेष न्यायाधीश ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले भी इस विवेचक के खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी आज तक अदालत को नहीं दी गई।

अदालत ने पुलिस आयुक्त आगरा को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि संबंधित विवेचक इमरान अहमद के विरुद्ध तत्काल विभागीय जांच शुरू कराई जाए और उसकी प्रगति आख्या कोर्ट के समक्ष सुनिश्चित रूप से प्रस्तुत की जाए।

साथ ही, न्याय प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए उन्हें भविष्य में किसी भी अन्य आपराधिक प्रकरण की जांच से दूर रखा जाए।

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विवेक कुमार जैन
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