आगरा 6 सितंबर।
योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ट्रस्ट के श्रीकृष्ण विग्रह के केस संख्या- 659/2023, श्री भगवान श्रीकृष्ण लला विराजमान आदि बनाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड आदि में आज दौरान जामा मस्जिद का प्रार्थना पत्र खारिज हो गया।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने जामा मस्जिद की सीढ़ियों के पुरातत्व विभाग द्वारा वैज्ञानिक सर्वे हेतु प्रार्थना पत्र दिया था।
जिस पर विपक्षी जामा मस्जिद ने विरोध करते हुए प्रार्थना पत्र दिया था कि वादी पहले, “मासिर ए आलमगीरी” पुस्तक की मूल प्रति न्यायालय में दाखिल करे।
जिस पर आज दौरान सुनवाई हुई बहस में वादी अधिवक्ता ने माननीय न्यायालय को बताया कि “मासिर ए आलमगीरी” पुस्तक के अनुवाद रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के अधीन सर जदुनाथ सरकार ने किया था।
आजादी से पहले रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल ब्रिटिश सरकार के अधीन एक संस्था थी और वर्तमान में भारत सरकार के अधीन संस्था हैं । जो कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय महत्व की संस्था है।
“मासिर ए आलमगीरी” पुस्तक की मूल प्रति संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के अधीन है । भारत सरकार ही “मासिर ए आलमगीरी” पुस्तक की मूल प्रति की सही जानकारी माननीय न्यायालय को दे सकती है और इस वाद में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को माननीय न्यायालय के आदेश द्वारा विपक्षी बनाया जा चुका है।
माननीय न्यायालय ने सुनवाई करते हुए जामा मस्जिद के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया और जामा मस्जिद की सीढ़ियों के सर्वे के विचाराधीन प्रार्थना पत्र की सुनावई की तिथि 17 सितंबर नियत कर दी।
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श्रीकृष्ण विग्रह केस लघुवाद न्यायाधीश माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव के न्यायालय में विचाराधीन है।
दौरान सुनवाई वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह व वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ न्यायालय में उपस्थित रहे।
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