आगरा दीवानी परिसर में मूलभूत सुविधाओं का संकट: 100 महिला अधिवक्ताओं ने न्याय प्रशासन से लगाई गुहार

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आगरा:

दीवानी परिसर में मूलभूत सुविधाओं, विशेषकर स्वच्छता और शौचालय की बदतर स्थिति को लेकर महिला अधिवक्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा है।

अपनी गरिमा और स्वास्थ्य के प्रति सजग 100 महिला अधिवक्ताओं ने एक सामूहिक प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर कर अधिवक्ता वरुण गौतम के माध्यम से जिला जज (न्याय प्रशासन) को सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

शौचालय की कमी और भीषण गंदगी बनी मुसीबत:

प्रार्थना पत्र में महिला अधिवक्ताओं ने दीवानी परिसर की दयनीय स्थिति का चित्रण करते हुए निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए हैं:

* सीमित उपलब्धता: परिसर में महिला शौचालयों और मूत्रालयों की संख्या अत्यंत सीमित है, जो हजारों की संख्या में आने वाली महिलाओं के लिए नाकाफी है।

* सफाई का अभाव: जो शौचालय उपलब्ध हैं, उनमें भी नियमित सफाई न होने के कारण भीषण गंदगी व्याप्त है।

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* पानी पीने से परहेज: गंदगी और शौचालय की अनुपलब्धता के कारण महिला अधिवक्ता दिनभर पानी पीने तक से परहेज करने को मजबूर हैं, ताकि उन्हें इन अस्वास्थ्यकर शौचालयों का उपयोग न करना पड़े। यह उनके स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

* बंद पड़े विकल्प: गेट नंबर तीन के समीप स्थित सुलभ शौचालय भी जर्जर अवस्था के कारण वर्तमान में बंद पड़ा है, जिससे संकट और गहरा गया है।

हजारों वादकारियों और अधिवक्ताओं का बुरा हाल:

गौर करने वाली बात यह है कि दीवानी परिसर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में अधिवक्ता और वादकारी अपने न्यायिक कार्यों के लिए आते हैं।

पुरुष मूत्रालयों की स्थिति तो महिलाओं से भी अधिक बेहाल है। ऐसी स्थिति में पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव न्याय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

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अधिवक्ता वरुण गौतम का पक्ष:

अधिवक्ता वरुण गौतम ने बताया कि अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए पेयजल, मूत्रालय और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं कोई विलासिता नहीं बल्कि अधिकार हैं।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने के बावजूद स्वच्छता का अभाव होना न्याय परिसर की छवि को धूमिल करता है।

महिला अधिवक्ताओं की इस जायज मांग पर प्रशासन को अविलंब संज्ञान लेकर नए शौचालयों का निर्माण और सफाई की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

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विवेक कुमार जैन
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