आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में आगामी ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलील:
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में यह मांग रखी गई कि जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक समय-बद्ध (Time-bound) कार्यक्रम रिकॉर्ड पर पेश किया जाना चाहिए।
याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243E का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि:
* पंचायत की अवधि पहली बैठक से केवल 5 वर्ष तक ही हो सकती है।
* संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने से “पहले” ही चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो जानी चाहिए।

विवाद का मुख्य बिंदु:
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग और संवैधानिक अनिवार्यताओं के बीच सामंजस्य को लेकर तीखी बहस हुई:
* निर्वाचन आयोग का पक्ष: आयोग के वकील ने यूपी पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12-BB का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव की तारीख तय करने वाली अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है।
* कोर्ट की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि नियमानुसार चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले संपन्न हो जाने चाहिए।
हाईकोर्ट के तीखे सवाल:
अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से विशेष रूप से स्पष्टीकरण मांगा है कि:
* क्या आयोग तय संवैधानिक समय सीमा के भीतर चुनाव कराने में सक्षम है ?
* 19 फरवरी 2026 की मौजूदा अधिसूचना के आलोक में चुनाव संपन्न कराने की वर्तमान स्थिति क्या है ?
अगली सुनवाई: कोर्ट इस गंभीर संवैधानिक विषय पर अब 25 मार्च 2026 को दोपहर 2:00 बजे अगली सुनवाई करेगा।
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