आगरा के जल निकायों और तालाबों के अतिक्रमण पर एनजीटी सख्त, जांच के लिए संयुक्त समिति गठित

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने आगरा जिले के विभिन्न गांवों और शहरों में स्थित तालाबों, पोखरों और अन्य जल निकायों के संरक्षण को लेकर एक अहम आदेश जारी किया है।

यह आदेश 17 सितंबर 2026 को अजय प्रताप सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने दिया।

वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने ट्रिब्यूनल के समक्ष आरोप लगाया है कि आगरा के मुहम्मदपुर, लखनपुर, सुनारी, मगटई, इकथरा, अभयपुरा, अकबरपुर, अकोला, इस्लामपुर, इटौरा, रुनकता, अगरपुर, अगरवार खास, अमानाबाद, दौलताबाद, फतेहपुरा, छः पोखर और खड़वाई समेत कई अन्य गांवों के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जल निकायों पर अतिक्रमण किया गया है।

उन्होंने बताया कि इन तालाबों में घरों का गंदा पानी और कूड़ा डंप किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।

याचिका में यह भी बताया गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक, जैसे ककरैठा गांव का गुरु का ताल और एतमादपुर का बुढ़िया का ताल भी अतिक्रमण की चपेट में हैं और इससे प्रभावित हो रहे हैं।

वादी अधिवक्ता ने इन ऐतिहासिक स्मारकों से अतिक्रमण हटाकर उनके संरक्षण व जीर्णोद्धार की माँग की है।

अतिक्रमण को साबित करने के लिए याचिकाकर्ता ने जियो-कोऑर्डिनेट और जीपीएस लोकेशन के साथ तस्वीरें और विभिन्न वर्षों के उपग्रह चित्र (सैटेलाइट इमेज) प्रस्तुत किए, जिनमें अतिक्रमण और कूड़ा साफ-साफ दिख रहा है और जिनसे पता चलता है कि पहले मौजूद कई जल निकाय अब अपना अस्तित्व खो चुके हैं या उन पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने संबंधित ग्रामों के तालाबों के राजस्व अभिलेख भी प्रस्तुत किए।

मामले को गंभीरता से लेते हुए, एनजीटी ने इसे पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन का एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना है और विपक्षीगणों को नोटिस जारी किए हैं।

इस केस में 11 विपक्षी बनाए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश राज्य (मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार), प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, प्रमुख सचिव, सिंचाई विभाग, प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग, प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग, जिलाधिकारी, आगरा, अध्यक्ष, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय अधिकारी, आगरा (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), नगर आयुक्त (सिटी कमिश्नर), नगर निगम आगरा, अध्यक्ष, आगरा विकास प्राधिकरण, अध्यक्ष, ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) शामिल हैं।

अधिकरण ने जल निकायों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए एक संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) का गठन किया है।

इस समिति में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, टीटीजेड और आगरा के जिलाधिकारी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। आगरा के जिलाधिकारी इस समिति में नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएंगे।

एनजीटी ने इस संयुक्त समिति को निर्देश दिया है कि वह पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर प्रत्येक जल निकाय के मूल क्षेत्रफल, अतिक्रमण किए गए हिस्से और वर्तमान में मौजूद क्षेत्र का आकलन करे तथा 10 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट/जवाब ट्रिब्यूनल को सौंपे।

इसके साथ ही, यूपीपीसीबी को निर्देश दिया गया है कि वह इन जल निकायों से पानी के नमूने एकत्र करे और अगली सुनवाई से पहले अपनी विश्लेषण रिपोर्ट (टेस्ट एनालिसिस रिपोर्ट) प्रस्तुत करे।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य की तरफ से अधिवक्ता भंवर पाल सिंह जादौन और गार्गी चतुर्वेदी उपस्थित रहे, जिन्होंने विपक्षी संख्या 1 से 6 की ओर से नोटिस स्वीकार किया। इस मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Group BulletinChannel Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

1 thought on “आगरा के जल निकायों और तालाबों के अतिक्रमण पर एनजीटी सख्त, जांच के लिए संयुक्त समिति गठित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *