आगरा।
जनपद की एक विशेष अदालत ने अश्लील छेड़छाड़, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और दलित उत्पीड़न के मामले में नामजद आरोपी सचिन को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करते हुए बरी करने के आदेश जारी किए हैं।
यह फैसला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय दिनेश कुमार चौरसिया की अदालत द्वारा सुनाया गया।
थाना हरी पर्वत में दर्ज मामले के विवरण के अनुसार, पीड़ित परिवार के पड़ोसी सचिन (निवासी नगला महादेव, फ्री गंज, थाना हरी पर्वत) पर आरोप था कि वह वादी की 16 वर्षीय पुत्री के साथ आए दिन अश्लील छेड़छाड़ करता था।
विरोध करने पर वह गाली-गलौज करता और जान से मारने की धमकी देता था। शिकायत किए जाने पर आरोपी के परिजनों और पुलिस ने भविष्य में ऐसी गलती न होने का आश्वासन देकर दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था।

इसके बावजूद, आरोप था कि 16 अगस्त 2016 की रात करीब 7:30 बजे आरोपी ने वादी की पुत्री का हाथ पकड़कर उसे अपने कमरे में खींचने का प्रयास किया।
जब किशोरी ने शोर मचाया, तो आरोपी उस पर तेजाब डालने की धमकी देते हुए मौके से भाग गया था।
इस मामले के विचारण के दौरान अदालत में वादी मुकदमा और पीड़िता सहित कुल चार गवाह पेश किए गए।
सुनवाई के दौरान मामले में उस समय नया मोड़ आया जब वादी मुकदमा और पीड़िता दोनों ही अदालत के समक्ष अपने पूर्व बयानों और आरोपों से पूरी तरह मुकर गए।
अदालत में आरोपी के अधिवक्ता योगेश शुक्ला और गुंजन अग्रवाल ने तर्क दिया कि जब मुख्य गवाह और पीड़िता ही घटना का समर्थन नहीं कर रहे हैं, तो आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत शेष नहीं रह जाता।
अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए और अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित न कर पाने के कारण साक्ष्य के अभाव में आरोपी सचिन को बरी करने का आदेश दिया।
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