आगरा:
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने अपनी मौसेरी बहन के अपहरण और अश्लील हरकत के मामले में आरोपी तरुण को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है।
न्यायालय ने यह निर्णय पीड़िता के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभासों और मेडिकल परीक्षण न कराने के आधार पर लिया।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह मामला आगरा के थाना लोहामंडी क्षेत्र का है। जून 2021 में वादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री दवाई लेने बाजार गई थी, जिसे उसका मौसेरा भाई तरुण बहला-फुसलाकर भगा ले गया। पुलिस ने घटना के 6 दिन बाद पीड़िता को बरामद किया था।
बरी किए जाने के मुख्य कारण:
अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता प्रतिभा आर्य और एस.के. गौतम के तर्कों के समक्ष अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर साबित हुआ।
बरी किए जाने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रहे:
* बयानों में निरंतर बदलाव: पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में आरोपी के विरुद्ध कुछ नहीं कहा, मजिस्ट्रेट के समक्ष अश्लील हरकत का आरोप लगाया और अदालत में गवाही के दौरान दुराचार (रेप) का आरोप लगाया।
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* मेडिकल परीक्षण से इंकार: पीड़िता को बरामदगी के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उसने अपना मेडिकल परीक्षण कराने से साफ इंकार कर दिया।
* बरामदगी स्थल पर विरोधाभास: पुलिस और वादी ने पीड़िता की बरामदगी पंचकुइयां चौराहे से दर्शाई थी, जबकि पीड़िता ने अपने बयानों में स्वयं को बोदला से बरामद होना बताया।
न्यायालय का निष्कर्ष:
न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने पीड़िता के बयानों में मौजूद भारी विरोधाभास और ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य (मेडिकल रिपोर्ट) के अभाव को देखते हुए आरोपी तरुण को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने के आदेश जारी किए।
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