आगरा।
व्यावसायिक लेन-देन में दिए गए 13 लाख 50 हजार रुपये के चेक के अनादर (डिसऑनर) होने के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-5 (एसीजेएम-5) माननीय शिवानी त्यागी की अदालत ने आरोपी व्यापारी को मुकदमे के विचारण (ट्रायल) के लिए 31 अगस्त को अदालत में तलब करने का आदेश जारी किया है।
मामले की पृष्ठभूमि और व्यावसायिक लेन-देन:
अदालत में दायर परिवाद के अनुसार, कटरा वजीर खां, रामबाग (आगरा) निवासी कन्हैया लाल अग्रवाल ‘गुंजन पॉलिप्लास्ट’ फर्म के संचालक हैं।
वादी के अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के माध्यम से अदालत को बताया गया कि बिहार के कैमूर जिला अंतर्गत रामगढ़ स्थित ‘न्यू चिराग हार्डवेयर’ के संचालक संतोष शाह ने वादी की फर्म से यूपीवीसी पाइपों की खरीद की थी।

व्यावसायिक लेन-देन के एवज में आरोपी संतोष शाह द्वारा वादी की फर्म को भुगतान के लिए 13 लाख 50 हजार रुपये का चेक जारी किया गया था।
चेक बाउंस और कानूनी कार्रवाई:
वादी द्वारा भुगतान प्राप्त करने के लिए जब उस चेक को अपने बैंक खाते में प्रस्तुत किया गया, तो वह अपर्याप्त धनराशि के कारण अनादरित (डिसऑनर) हो गया।
इसके बाद वादी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को निर्धारित समयावधि में नोटिस भेजा, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
अदालत का आदेश:
अधिवक्ता अनिल अग्रवाल के माध्यम से नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (एनआई एक्ट) के तहत अदालत में मुकदमा दायर किया गया।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, चेक बाउंस होने के प्रमाण और वादी पक्ष की दलीलों का अवलोकन करने के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-5 माननीय शिवानी त्यागी ने प्रथम दृष्टया मामला सही पाते हुए आरोपी संतोष शाह को मुकदमे के विचारण के लिए आगामी 31 अगस्त को अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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