आगरा।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) तृतीय माननीय विवेक विक्रम की अदालत ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट और जानलेवा हमले के एक गंभीर मामले में संज्ञान लेते हुए शमसाबाद थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश अदालत ने वादिया के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के उपरांत दिया है।
अदालत में पेश किए गए मामले के अनुसार, वादिया श्रीमती प्रीति का विवाह 29 नवंबर 2020 को शमसाबाद, आगरा निवासी प्रदीप रघुवंशी के साथ संपन्न हुआ था।
वादिया का आरोप है कि विवाह में दिए गए दहेज से ससुराल पक्ष के लोग संतुष्ट नहीं थे। अतिरिक्त दहेज के रूप में दो लाख रुपये मायके से लाने का दबाव बनाते हुए पति प्रदीप रघुवंशी, सास श्रीमती संजू देवी और देवर भूपेंद्र अक्सर उसे प्रताड़ित करते थे और उसके साथ मारपीट करते थे।
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प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि मांग पूरी करने में असमर्थता जताने पर 30 मार्च 2026 की सुबह लगभग 9 बजे विपक्षीगण ने वादिया के साथ लात-घूंसों और डंडों से बुरी तरह मारपीट की।
इसी दौरान वादिया को जान से मारने की नीयत से उसके पति प्रदीप रघुवंशी ने तमंचे से उस पर फायर कर दिया। गनीमत रही कि फायर मिस हो गया, जिससे वादिया बाल-बाल बच गई।
घटना के दौरान वादिया की चीख-पुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग मौके पर एकत्र हो गए। सूचना मिलने पर जब वादिया के पिता वहां पहुंचे, तो विपक्षीगण द्वारा उनके साथ भी धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की गई।
इस मामले में वादिया की ओर से अधिवक्ता दिनेश सिंह धाकरे ने अदालत के समक्ष पैरवी की और कानूनी तर्क रखे।
अदालत ने मामले की गंभीरता और अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए थाना शमसाबाद पुलिस को आरोपी पति, सास और देवर के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में अविलंब मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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