आगरा।
जनपद के शमशाबाद थाना क्षेत्र से जुड़े गैंग बनाकर अपराध करने और अवैध संपत्ति अर्जित करने के एक पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या 7) माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने मामले के तीनों आरोपियों गिर्राज राठौर, दयाशंकर और वेताली को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करते हुए बरी करने के आदेश जारी किए हैं। ये तीनों आरोपी मूल रूप से राजाखेड़ा, जिला धौलपुर (राजस्थान) के निवासी हैं।
थाना शमशाबाद में दर्ज मामले के विवरण के अनुसार, यह मुकदमा 20 दिसंबर 2010 को शमशाबाद के तत्कालीन थानाध्यक्ष आनंद प्रकाश मिश्रा द्वारा दर्ज कराया गया था।
पुलिस का आरोप था कि इन लोगों ने एक संगठित गिरोह (गैंग) बनाकर विभिन्न आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया और उससे अवैध रूप से संपत्ति जुटाई।

पुलिस ने गिर्राज सिंह राठौर को इस गैंग का लीडर बताते हुए दयाशंकर और वेताली के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के तहत कार्यवाही की थी।
न्यायालय में मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता पाल सिंह राठौर ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
उन्होंने अपनी विधिक दलीलों में कोर्ट को बताया कि पुलिस द्वारा आरोपियों पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और अभियोजन पक्ष उनके मुवक्किलों के खिलाफ अदालत में कोई भी ठोस या विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों की कमी को देखते हुए तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ दिया।
अदालत ने इस मामले में पर्याप्त सबूत न होने के कारण गिर्राज राठौर, दयाशंकर और वेताली को इस केस से ससम्मान बरी करने का फैसला सुनाया।
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