आगरा।
स्थाई लोक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह वादी को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चार लाख रुपये का भुगतान करे।
इसके साथ ही न्यायालय ने शिकायतकर्ता को मुकदमा खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अतिरिक्त देने के भी निर्देश दिए हैं।
यह मामला आगरा के देहली गेट स्थित प्रोफेसर कॉलोनी निवासी अतुल जैन पुत्र स्वर्गीय प्रेम चंद जैन का है।
उन्होंने अपने अधिवक्ता राजीव कुलश्रेष्ठ के माध्यम से स्थाई लोक अदालत में एक वाद दायर किया था।
याचिका में कहा गया था कि उनकी पत्नी श्रीमती स्वाति जैन का केनरा बैंक की संजय प्लेस शाखा में खाता था, जिसके माध्यम से उन्होंने क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड की सुविधाएं ले रखी थीं।
Also Read – साक्ष्य के अभाव में गैंग बनाकर अपराध करने के तीन आरोपी आगरा कोर्ट से बरी

अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि छह जून 2021 को एक सड़क दुर्घटना में श्रीमती स्वाति जैन की असमय मृत्यु हो गई थी।
चूंकि मृतका के बैंक खाते में उनके पति अतुल जैन नामांकित (नॉमिनी) थे, इसलिए नियमानुसार वह बीमा राशि के हकदार थे।
बैंक के नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड धारक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है।
इसके बावजूद विपक्षी इंश्योरेंस कंपनी ने पीड़ित पति को बीमा राशि का भुगतान करने से इनकार कर दिया था।
मामले की विस्तृत सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों को परखने के बाद स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष माननीय शोभा पोरवाल तथा सदस्य हेमलता गौतम और पद्मजा शर्मा की पीठ ने इंश्योरेंस कंपनी की सेवा में कमी पाई।
अदालत ने विपक्षी कंपनी को आदेश दिया कि वह दुर्घटना तिथि से भुगतान के समय तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चार लाख रुपये की क्लेम राशि वादी अतुल जैन को अदा करे।
साथ ही मानसिक प्रताड़ना और विधिक व्यय की क्षतिपूर्ति के लिए पांच हजार रुपये का मुकदमा खर्च भी देने का आदेश जारी किया।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin
- भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी को लेकर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा न्यायालय में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज - November 4, 2026
- आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का इंडियन बैंक पर कड़ा प्रहार: पीपीएफ खातों से अवैध कटौती पर ग्राहकों के पक्ष में सुनाया फैसला - November 4, 2026
- सांसद कंगना रनौत के खिलाफ ‘गटर जनरेशन’ टिप्पणी मामले में रिवीजन याचिका निरस्त, अदालत ने कहा- परिवादी को विधिक अधिकार नहीं - November 3, 2026




