आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले वकीलों, विशेष रूप से बार एसोसिएशनों में प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
हाईकोर्ट ने कानून के शासन के लिए संभावित खतरा बताते हुए, प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और डीजीपी अभियोजन से उत्तर प्रदेश के वकीलों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश:
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी तब की, जब वह अधिवक्ता मोहम्मद कफील की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट को पता चला कि याचिकाकर्ता स्वयं गैंगस्टर एक्ट सहित कई आपराधिक मामलों में आरोपी है और उसके भाई कुख्यात अपराधी हैं।
Also Read – आगरा की MP-MLA कोर्ट में चल रहे राणा सांगा केस में रामजीलाल सुमन के अधिवक्ता हाज़िर, अगली सुनवाई 15 दिसंबर को

कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रणाली की ताकत केवल वैधानिक प्रावधानों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से आती है। जब गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति कानूनी प्रणाली में प्रभाव वाले पदों पर होते हैं, तो यह वैध चिंता का विषय है कि वे पेशेवर वैधता की आड़ में पुलिस अधिकारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं पर अनुचित प्रभाव डाल सकते हैं।
मांगा गया विस्तृत विवरण:
कोर्ट ने सभी कमिश्नर/एसएसपी/एसपी और संयुक्त निदेशक अभियोजन को यूपी बार कौंसिल में रजिस्टर्ड वकीलों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का व्यापक विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट के आदेश के तहत मांगे गए मुख्य बिंदु:
* FIR का विवरण: पंजीकरण की तिथि, अपराध संख्या, धाराएं और संबंधित थाना।
* विवेचना की स्थिति।
* चार्जशीट दाखिल करने और आरोप तय करने की तिथि।
* परीक्षित गवाहों का विवरण और ट्रायल की वर्तमान स्थिति।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस से संबंधित विवरण डीजीपी और अभियोजन पक्ष की जानकारी डीजीपी अभियोजन द्वारा प्रस्तुत की जाएगी।
कोर्ट ने प्रशासन द्वारा किसी भी तरह की ढिलाई को गंभीरता से लेने की चेतावनी भी दी है।
Also Read – पुलिस दल पर जानलेवा हमला: कासगंज के आरोपी को 3 साल की कैद और ₹30,000/- का जुर्माना

सुनवाई का आधार:
दरअसल, याचिकाकर्ता मोहम्मद कफील ने याचिका में इटावा के अपर सत्र न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने पुलिस अधिकारियों को तलब करने की उनकी प्रार्थना को खारिज कर दिया था।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर याचिकाकर्ता और उसके पांच भाइयों – शकील, नौशाद, अकील, फैजान उर्फ गुड्डू और दिलशाद – के आपराधिक इतिहास का खुलासा किया, जिनमें हत्या का प्रयास, गोहत्या, गैंगस्टर एक्ट और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
याचिकाकर्ता ने भी पूरक हलफनामे में अपने खिलाफ कुछ मामलों के दर्ज होने की बात स्वीकार की है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin
- इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: थाने अब व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बने, डीजीपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश - July 31, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट में पीठासीन जज तक पहुंचने का प्रयास, न्यायमूर्ति ने स्वयं को सुनवाई से किया अलग - July 31, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट से क्रिकेटर यश दयाल को बड़ी राहत, गाजियाबाद दुष्कर्म केस की कार्यवाही पर लगाई रोक - July 31, 2026




