कुल्हाड़ी से गर्दन काट हत्या के आरोप में पांच बरी, अदालत ने कहा संदेह सबूत का स्थान नहीं ले सकता

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आगरा।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे 19) माननीय लोकेश कुमार की अदालत ने कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर की गई हत्या के एक चर्चित मामले में फैसला सुनाया है।

अदालत ने साक्ष्य के अभाव और अभियोजन पक्ष द्वारा संदेह को ठोस प्रमाण में न बदल पाने के कारण एक ही परिवार के पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।

न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में टिप्पणी करते हुए कहा कि संदेह चाहे जितना गहरा हो, वह सबूत का स्थान नहीं ले सकता।

मामले के विवरण के अनुसार, यह घटना रकाबगंज थाना क्षेत्र की है। वादी मुकदमा महेश कर्दम (निवासी ओलिया रोड, रकाबगंज) ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनके घर के सामने रहने वाले राजेंद्र उर्फ बंटी की पत्नी सोनिया उर्फ सोनू ने उनके पुत्र सिकंदर कर्दम को अपने प्रेम जाल में फंसा रखा था।

वादी का कहना था कि उनका पुत्र जो भी कमाता था, वह सोनिया पर खर्च कर देता था।  इस बात को लेकर आरोपी राजेंद्र उर्फ बंटी और उसके पुत्र वादी के बेटे से रंजिश मानते थे।

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अभियोजन के मुताबिक, घटना वाली रात वादी का पुत्र सिकंदर अपने निर्माणाधीन मकान में सो रहा था। वादी ने आरोप लगाया कि उसी रात आरोपी राजेंद्र, उसकी पत्नी और पुत्रों ने कुल्हाड़ी से गला काटकर सिकंदर की हत्या कर दी।

अगली सुबह जब वादी एक मिस्त्री के साथ वहां पहुंचा, तो उसे अपने बेटे का रक्तरंजित शव मिला। इसी शक के आधार पर वादी ने आरोपियों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी सहित कुल 10 गवाह पेश किए गए। वहीं, आरोपियों की ओर से अधिवक्ता हैदर अली ने अदालत में मजबूत पैरवी की।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अभियोजन की कहानी केवल शक पर आधारित है। यह मामला पूरी तरह से परिस्थिति जन्य साक्ष्यों (सर्कमस्टेंशियल एविडेंस) पर निर्भर था, लेकिन अभियोजन पक्ष साक्ष्यों की कड़ियों को आपस में जोड़ने में पूरी तरह विफल रहा।

इसके अतिरिक्त विवेचना में पुलिस की बड़ी लापरवाही भी सामने आई। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार (कुल्हाड़ी) से आरोपियों के फिंगर प्रिंट लेकर उनका मिलान ही नहीं कराया था, जो मामले में एक अहम सबूत हो सकता था।

एडीजे 19 माननीय लोकेश कुमार की अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए माना कि परिस्थिति जन्य साक्ष्य की कड़ियां आपस में नहीं जुड़ रही हैं और पुलिस की जांच में गंभीर खामियां हैं।

साक्ष्यों के अभाव के चलते न्यायालय ने आरोपी राजेंद्र उर्फ बंटी, उसकी पत्नी सोनिया उर्फ सोनू और उनके तीन पुत्रों आशीष, अंकुश तथा आदित्य (सभी निवासी टीला बालू गंज, थाना रकाबगंज, आगरा) को हत्या के आरोप से बरी कर दिया।

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विवेक कुमार जैन
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