आगरा।
चैक डिसऑनर (Check Dishonor) के एक पुराने मामले में स्थानीय अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। वादी के लंबे समय तक अदालत में उपस्थित न होने और साक्ष्यों के अभाव के चलते अतिरिक्त न्यायालय संख्या 1 के पीठासीन अधिकारी माननीय राज बहादुर सिंह मौर्य ने आरोपी पूरन चंद जैन को दोषमुक्त (बरी) करने के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला ?
रकाबगंज थाना क्षेत्र के बालूगंज निवासी वादी दीपक जैन ने आरोपी पूरन चंद जैन (निवासी छिपीटोला) के खिलाफ वाद दायर किया था।
आरोप था कि:
* वर्ष 2018 में आरोपी ने जरूरत पड़ने पर वादी से 1 लाख 60 हजार रुपये उधार लिए थे।
* आरोपी ने यह रकम 15 दिन में वापस करने का वादा किया था।
* भुगतान के लिए आरोपी ने जो चैक दिया, वह बैंक में लगाने पर डिसऑनर (बाउंस) हो गया।

अदालत की कार्रवाई और फैसला:
मुकदमा दायर होने के बाद शुरुआती दौर में वादी दीपक जैन अदालत में पैरवी के लिए हाजिर होता रहा। हालांकि, मामला जब गवाही के निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, तो वादी पिछले 18 महीनों से अदालत में पेश नहीं हुआ।
अदालत ने इसे मामले की पैरवी में लापरवाही और साक्ष्यों की कमी माना। आरोपी के अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाहा ने तर्क दिया कि वादी के अनुपस्थित रहने से आरोपों की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इन तर्कों को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में पूरन चंद जैन को बरी कर दिया।
मामले के मुख्य बिंदु:
* आरोपी: पूरन चंद जैन (निवासी रकाबगंज, आगरा)।
* मामला: धारा 138 एनआई एक्ट (चैक बाउंस)।
* विवादित राशि: 1 लाख 60 हजार रुपये।
* अदालत: अतिरिक्त न्यायालय संख्या 1 माननीय राज बहादुर सिंह मौर्य।
* अधिवक्ता: अशोक कुमार कुशवाहा
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