आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एमएम इंडस्ट्रीज मथुरा और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में बैंक अधिकारियों के कार्य व्यवहार पर सख्त टिप्पणी की है।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने रिट याचिका संख्या 17968/2026 पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया है कि बैंक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करेगा।
मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता की आपत्ति:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ के समक्ष एमएम इंडस्ट्रीज और अन्य ने याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता केनरा बैंक के उस आदेश से असंतुष्ट था, जिसमें उसे एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) का लाभ देने से मना कर दिया गया था।
बैंक का तर्क था कि याचिकाकर्ता ने अपने उस वादे को पूरा नहीं किया, जिसमें उसने 15 मार्च 2026 तक पूरी बकाया राशि जमा करने की बात कही थी।

न्यायालय का अवलोकन और बैंक के आचरण पर टिप्पणी:
न्यायालय ने पाया कि बैंक ने याचिकाकर्ता के ओटीएस आवेदन को केवल उसके पिछले आचरण के आधार पर खारिज कर दिया, जबकि अदालत ने पहले ही नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया था।
माननीय न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि यदि ओटीएस योजना उस समय प्रभावी थी, तो बैंक को याचिकाकर्ता के अनुरोध पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था।
बैंक अधिकारियों द्वारा आवेदन को इस तरह अस्वीकार करने को न्यायालय ने अनुचित माना और इसे कार्रवाई के योग्य आचरण बताया।
अंतरिम राहत और अगली सुनवाई:
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के अधिवक्ता ने कोर्ट से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय माँगा।
न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 25 मई 2026 की तारीख तय की है। तब तक के लिए कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बैंक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करेगा।
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