18 साल बाद विद्युत चोरी के मामले में आरोपी बरी, अदालत ने बिजली विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर की तीखी टिप्पणी

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आगरा ।

विशेष न्यायाधीश (ई.सी. एक्ट) माननीय पवन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने 18 साल पुराने विद्युत अधिनियम (इलेक्ट्रिसिटी एक्ट) के एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी कन्हैया लाल को बरी कर दिया है।

न्यायालय ने सबूतों के अभाव और फर्जीवाड़े की आशंका को देखते हुए पुलिस और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी फटकार लगाई है।

मामले की पृष्ठभूमि:

थाना डौकी (आगरा) के ग्राम गुड़ा निवासी कन्हैया लाल (पुत्र स्व. मूल चंद) के खिलाफ 5 दिसंबर 2007 को मुकदमा दर्ज किया गया था।

वादी मुकदमा और अवर अभियंता सुरेश चंद शंखवार ने आरोप लगाया था कि विभागीय टीम के साथ चेकिंग के दौरान कन्हैया लाल को बिना मीटर के डायरेक्ट लाइन डालकर अपनी आटा चक्की चलाते हुए पकड़ा गया था।

इस तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

अभियोजन और गवाह:

अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में अवर अभियंता सुरेश चंद शंखवार, छतर सिंह, उपनिरीक्षक राम खिलाड़ी, उपनिरीक्षक सोन पाल सिंह और विद्युत विभाग के कार्यकारी सहायक हिमांशु बजाज को गवाही के लिए अदालत में पेश किया गया।

वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह पटेल ने पैरवी की।

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न्यायालय की टिप्पणियां और फैसला:

अदालत ने पत्रावली का गहनता से अवलोकन करने के बाद अभियोजन पक्ष की कहानी में कई बड़ी खामियां पाईं।

विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में निम्नलिखित बिंदुओं पर कड़ी आपत्ति जताई:

* स्वतंत्र गवाह का अभाव: विद्युत विभाग और पुलिस द्वारा इस मामले में किसी भी स्वतंत्र गवाह को अदालत में पेश नहीं किया गया।

* भौतिक साक्ष्य की कमी: बिजली चोरी साबित करने के लिए घटनास्थल से कोई केबल या अन्य उपकरण बरामद कर अदालत में पेश नहीं किया गया।

* प्रक्रिया का उल्लंघन: चेकिंग रिपोर्ट पर ना तो आरोपी के हस्ताक्षर कराए गए थे और ना ही उसे उस रिपोर्ट की कोई प्रति सौंपी गई थी।

* पुलिस की लापरवाही: पुलिस ने मामले की कोई निष्पक्ष विवेचना नहीं की और केवल विद्युत विभाग के कहने पर ही बिना जांच के आरोप पत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल कर दिया।

बचाव पक्ष के तर्क को मिला बल:

न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से अंकित किया कि उपरोक्त विवेचना से बचाव पक्ष के इस तर्क को बल मिलता है कि तत्कालीन विभागीय कर्मचारियों द्वारा बिजली कनेक्शन देने के एवज में अवैध धन (रिश्वत) की मांग की गई थी।

मांग पूरी ना होने पर कर्मचारियों ने कार्यालय में बैठकर ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पुलिस में झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया।

अदालत ने पुलिस जांच और विभाग की नीयत पर सवाल उठाते हुए आरोपी कन्हैया लाल को संदेह का लाभ प्रदान किया और 18 साल तक चले इस मुकदमे से उन्हें ससम्मान बरी करने के आदेश दिए।

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विवेक कुमार जैन
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