नकली मोबी ऑयल बेचने के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, दो आरोपियों को 30 साल बाद 5 वर्ष की कैद

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

प्रसिद्ध कंपनियों के नाम पर नकली और मिलावटी मोबी ऑयल बेचने के तीन दशक पुराने मामले में अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाया है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) माननीय शारिब अली ने धोखाधड़ी और कॉपीराइट एक्ट के तहत दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही दोनों दोषियों पर कुल 54 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

अभियोजन पक्ष की ओर से थाना छत्ता में दर्ज कराए गए मामले के अनुसार, यह कार्रवाई 1 जुलाई 1996 को की गई थी।

तत्कालीन थानाध्यक्ष और मामले के वादी शिव कुमार गौड़ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि फ्री गंज इलाके में नकली मोबी ऑयल का अवैध कारोबार चल रहा है।

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इस सूचना पर पुलिस टीम ने फ्री गंज स्थित दुकान पर छापा मारा था।

पुलिस ने मौके से सुनील कुमार गर्ग पुत्र राधा रमन गर्ग (निवासी पाती राम गली, थाना छत्ता) और राकेश अग्रवाल पुत्र राज नारायण अग्रवाल (निवासी फ्री गंज, थाना छत्ता) को हिरासत में लिया था।

जांच में सामने आया कि ये दोनों आरोपी नामी और नामचीन कंपनियों के खाली डिब्बों (कट्टी) में घटिया व मिलावटी मोबी ऑयल भरकर ग्राहकों को असली बताकर बेचते थे और उनके साथ धोखाधड़ी करते थे।

छापे के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में नकली मोबी ऑयल, खाली डिब्बे और अन्य पैकेजिंग सामग्री बरामद की थी।

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न्यायालय में मामले की लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पुख्ता पैरवी की गई।

सीजेएम माननीय शारिब अली ने वादी मुकदमा शिव कुमार गौड़ और विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक गिरीश चंद्र तिवारी की महत्वपूर्ण गवाहियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को आधार मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

घटना के करीब 30 वर्ष बाद आए इस फैसले में अदालत ने दोनों दोषियों को पांच वर्ष के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा से दंडित किया।

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विवेक कुमार जैन
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