आगरा/नयी दिल्ली ।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एटा शहर के मुख्य नाले और उसके बफर जोन पर हुए अतिक्रमण को लेकर दायर एक अहम याचिका अजय प्रताप सिंह आदि बनाम प्रमुख सचिव जल एवं सिंचाई संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार आदि) पर सुनवाई करते हुए सभी विपक्षीगणों को नोटिस जारी किए हैं।
याचिकाकर्ता और अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने अधिकरण को बताया कि एटा शहर का मुख्य नाला कैलाश मंदिर स्थित तालाब से निकलकर मानपुर की तरफ जाता है।
शहर के दूसरे हिस्से का नाला भी इसी में आकर मिलता है, जो शहर से बाहर शीतलपुर, मानपुर, भदों से होता हुआ सकीट तक जाता है।
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आरोप है कि इस नाले और इसके बफर जोन पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है, जो पर्यावरणीय नियमों के पूरी तरह से विरुद्ध है।
सुनवाई के दौरान वादी अधिवक्ता द्वारा शीतलपुर, मानपुर और भदों ग्राम के नाले से संबंधित राजस्व अभिलेखों को अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
इसके साथ ही मौजा मानपुर में हुए अतिक्रमण की जमीनी तस्वीरें और शहर में नाले पर हुए कब्जे को दर्शाने वाले सेटेलाइट चित्र भी साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए।
इन साक्ष्यों और दलीलों पर गौर करते हुए माननीय एनजीटी ने इसे गंभीर पर्यावरणीय मामला माना और याचिका स्वीकार कर ली।
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इस मामले में अजय प्रताप सिंह एडवोकेट (वादी संख्या- 1) और कैलाश चंद्र राठौर (वादी संख्या- 2) ने याचिका दायर की है। वहीं, विपक्षीगणों में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्रालय विभाग उत्तर प्रदेश सरकार, प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग उत्तर प्रदेश सरकार, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिलाधिकारी एटा और दो अन्य प्राइवेट पार्टियों को पक्षकार बनाया गया है।
अधिकरण ने सभी प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर के लिए नियत की गई है।
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