जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने सेवा में कमी के मामले में गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड और उसके सहयोगी डेवलपर्स के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह 90 दिनों के भीतर फ्लैट का निर्माण मानकों के अनुरूप पूरा करे और खरीदारों को कब्जा सौंपकर विक्रय विलेख निष्पादित करे।
आगरा के ओल्ड ईदगाह कॉलोनी निवासी परिवादी अश्विनी जैन और उनकी पत्नी कनुप्रिया जैन ने बिल्डर की आवासीय योजना ‘गोदरेज नेस्ट’, सेक्टर 150, नोएडा में टावर ए-1 में यूनिट संख्या 1803 बुक की थी।
आवंटन पत्र 27 फरवरी 2018 को जारी किया गया था और फ्लैट की कुल कीमत 76,71,118/- रुपये निर्धारित की गई थी। एग्रीमेंट के पेमेंट प्लान के अनुसार, परिवादियों ने विभिन्न तिथियों पर 5 दिसंबर 2019 तक कुल 32,07,577/- रुपये की धनराशि बिल्डर के पास जमा कर दी थी।

अनुबंध की शर्तों के अनुसार, बिल्डर को 31 दिसंबर 2022 तक फ्लैट का निर्माण पूरा करके कब्जा प्रदान करना था। लेकिन, समय पर निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया।
इसके विपरीत, बिल्डर ने 31 अक्टूबर 2022 को एक निरस्तीकरण पत्र जारी करते हुए मनमाने ढंग से फ्लैट का आवंटन रद्द कर दिया और परिवादियों द्वारा जमा की गई पूरी रकम जब्त कर ली।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने बिल्डर की इस कार्रवाई को सेवा में कमी माना और निरस्तीकरण पत्र को रद्द कर दिया।
आयोग ने आदेश दिया है कि परिवादियों द्वारा जमा की गई 32,07,577/- रुपये की राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज जोड़ते हुए उसे फ्लैट की मूल कीमत में समायोजित किया जाए।
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इसके अतिरिक्त, बिल्डर को मानसिक और आर्थिक पीड़ा के लिए 2,00,000/- रुपये तथा वाद-व्यय के रूप में 20,000/- रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि बिल्डर तय समय में इसका पालन करने में चूक करता है, तो उसे 6 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत वार्षिक दण्ड ब्याज देना होगा।
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