आगरा।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-3) माननीय विकास गोयल की अदालत ने थाना एतमाद्दौला क्षेत्र से जुड़े दहेज हत्या और उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में साक्ष्य के अभाव में आरोपित पति और सास को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वादी रमन बाबू शर्मा ने थाना एतमाद्दौला में मुकदमा दर्ज कराया था। वादी का कहना था कि उनकी पुत्री निधि शर्मा का विवाह 29 नवंबर 2009 को सुदामापुरी, नरायच (आगरा) निवासी विकास शर्मा पुत्र मुन्ना लाल के साथ हुआ था।
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वादी द्वारा आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद से ही पति विकास शर्मा, सास प्रकाशी देवी और ससुर मुन्ना लाल अतिरिक्त दहेज के रूप में मायके से दस लाख रुपये लाने का दबाव बनाते थे और इसी मांग को लेकर वे निधि के साथ मारपीट व मानसिक उत्पीड़न करते थे।
अभियोजन के मुताबिक, दहेज की यह मांग पूरी करने में असमर्थता जताने पर 10 मार्च 2012 को ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा वादी की पुत्री की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। मामले के विचारण (ट्रायल) के दौरान आरोपित ससुर मुन्ना लाल की मृत्यु हो गई थी, जिसके चलते अदालत ने उनके विरुद्ध न्यायिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया था।
इस प्रकरण को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, उनके पुत्र और पत्नी सहित कुल 8 गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से आरोपितों के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. हरी दत्त शर्मा ने अपनी दलीलें पेश कीं।
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अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को विस्तार से सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन करने के पश्चात पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा है।
साक्ष्यों के अभाव और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए, एडीजे-3 की अदालत ने आरोपित पति विकास शर्मा और सास श्रीमती प्रकाशी देवी को बरी करने के आदेश दिए।
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