आगरा ।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे 30) माननीय कुंदन किशोर सिंह की अदालत ने अपहरण, दुराचार, पॉक्सो एक्ट और दलित उत्पीड़न के एक मामले में आरोपित को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
न्यायालय ने यह फैसला पीड़िता द्वारा आरोपी के पक्ष में गवाही देने के बाद सुनाया। आरोपित सेमोल डी राम पुत्र डेविड ई राम, नई आबादी, सेवला जाट, थाना सदर, जिला आगरा का निवासी है।
थाना सदर में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मामले की वादिया (पीड़िता की मां) ने आरोप लगाया था कि 21 जुलाई 2019 की रात करीब 1 बजे वह अपने पति और 16 वर्षीय पुत्री के साथ घर में सो रही थी।
इसी दौरान उसकी पुत्री शौच के लिए बाहर गई। देर तक वापस न आने पर जब मां ने बाहर जाकर देखा, तो उनका पड़ोसी आरोपी किशोरी से बात करता नजर आया।
वादिया के आवाज लगाने पर आरोपी किशोरी को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर भगा ले गया। घटना के करीब एक वर्ष बाद किशोरी वापस लौट कर आई थी।

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान केवल वादिया, पीड़िता और हेड कांस्टेबल अमर चंद वर्मा की ही गवाही दर्ज हो सकी।
अभियोजन पक्ष के मामले को तब झटका लगा जब पीड़िता ने अदालत में बताया कि उसने अपना मेडिकल परीक्षण नहीं कराया था और न ही उसने आरोपी के खिलाफ कोई आरोप लगाया।
पीड़िता ने न्यायालय के समक्ष बयान दिया कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और उसने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से आरोपी से शादी की है।
उसने अदालत को यह भी बताया कि वह वर्तमान में आरोपी के दो बच्चों की मां है। पीड़िता ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उसके या उसके पति के साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए उसके मायके वाले (परिजन) जिम्मेदार होंगे।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, पीड़िता के स्पष्ट बयानों और बचाव पक्ष के अधिवक्ता रजनीश अवस्थी के तर्कों पर विचार करते हुए आरोपी सेमोल डी राम को अपहरण, दुराचार और पॉक्सो एक्ट सहित सभी धाराओं में दोषमुक्त करार देते हुए बरी करने के आदेश जारी किए।
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