आगरा ।
न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय महेश चंद वर्मा की अदालत ने मदद के बहाने एटीएम कार्ड बदलकर खाते से एक लाख साठ हजार रुपये निकालने के मामले में एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
अदालत ने एफआईआर में देरी और पुलिस जांच में बरती गई लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए यह अहम फैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी कृष्णा सिंह ने 8 अगस्त 2022 को थाना फतेहाबाद में मुकदमा दर्ज कराया था।
अपनी तहरीर में वादी ने बताया था कि 23 जुलाई 2022 की दोपहर करीब 2:30 बजे वह बैंक ऑफ इंडिया, फतेहाबाद के एटीएम से पैसे निकालने गया था।
वहां पहले से मौजूद दो युवकों ने वादी की मदद करने के बहाने उसका एटीएम कार्ड धोखे से बदल लिया।
इसके कुछ ही मिनटों बाद, दोपहर 2:38 बजे वादी के मोबाइल पर बैंक से मैसेज आया कि उसके खाते से 1 लाख 60 हजार रुपये कट गए हैं।
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इस मामले की विवेचना के दौरान थाना फतेहाबाद पुलिस ने जिला अलीगढ़ के थाना टप्पल स्थित नूरपुर निवासी अल्लाह राजी पुत्र युनुस और उसके अन्य साथियों को हिरासत में लिया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई एटीएम कार्ड बरामद होने का दावा भी किया था।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी सहित कुल चार गवाह पेश किए गए। वहीं, आरोपी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विवेक पराशर ने अदालत के समक्ष कड़े तर्क प्रस्तुत किए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना और रिपोर्ट दर्ज कराने के बीच बहुत अधिक अंतराल है।
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इसके अतिरिक्त, विवेचक द्वारा जांच में घोर लापरवाही बरती गई है और अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस सुबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, एडीजे 13 माननीय महेश चंद वर्मा की अदालत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए माना कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई देरी और विवेचनात्मक खामियों के कारण मामला संदेह के घेरे में है।
ठोस साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने आरोपी अल्लाह राजी को धोखाधड़ी एवं अन्य धाराओं से बरी करने के आदेश दिए।
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