आगरा।
विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) ने वर्ष 2008 में हुई एक हत्या और दलित उत्पीड़न के मामले में अहम फैसला सुनाया है।
विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी सुनील उर्फ मटका को दोषी करार दिया है और उसे आजीवन कारावास तथा 40 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
थाना जगदीशपुरा में दर्ज मुकदमे के अनुसार, वादी जानकी प्रसाद (निवासी सुभाष पुरम, थाना जगदीशपुरा, आगरा) के भाई की एक विवाद के बाद निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी गई थी।
इस हत्याकांड को आरोपी सुनील उर्फ मटका (निवासी किशोर पुरा, थाना जगदीशपुरा) और राजू उर्फ राजेंद्र सिंह ने लोहे की रॉड से प्रहार करके अंजाम दिया था।
वादी की तहरीर के आधार पर थाना जगदीशपुरा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 नवंबर 2008 को आरोपी राजू उर्फ राजेंद्र सिंह को और 19 नवंबर 2008 को आरोपी सुनील उर्फ मटका को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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इस सनसनीखेज मामले की विवेचना तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद द्वारा की गई थी। उल्लेखनीय है कि बाद में आईजी जोन के पद पर रहते हुए उन्होंने इस मुकदमे में गवाह के रूप में अदालत में अपना बयान भी दर्ज कराया था।
न्यायालय की कार्यवाही के दौरान आरोपी राजू उर्फ राजेंद्र सिंह की पत्रावली अलग कर दी गई थी।
विशेष न्यायाधीश माननीय शिव कुमार ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। अदालत ने वादी जानकी प्रसाद, तत्कालीन विवेचक एवं आईजी जोन अब्दुल हमीद सहित अन्य गवाहों के बयानों, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीओ) मृत्युंजय सिंह के तर्कों का भली-भांति अवलोकन किया।
सभी साक्ष्यों और गवाहियों को पर्याप्त मानते हुए न्यायालय ने सुनील उर्फ मटका को हत्या और दलित उत्पीड़न का दोषी पाया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।
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