आगरा।
अपहरण और दुराचार के एक मामले में, अपर जिला न्यायाधीश (एडीजे) फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी चरन सिंह और मुरारी, पुत्रगण अमर सिंह, निवासीगण राजपुर, थाना कोलारी, जिला धौलपुर (राजस्थान) को बरी कर दिया है।
अदालत ने यह फैसला पीड़िता के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभास और पुष्ट साक्ष्य के अभाव के कारण सुनाया।
मामले का विवरण:
यह मामला मूल रूप से धौलपुर के मजिस्ट्रेट को दिए गए एक प्रार्थना पत्र पर आधारित था। वादिनी ने आरोप लगाया था कि 30 मई, 2014 की सुबह 11 बजे वह अपने तीन साल के बेटे के साथ टेम्पो में बैठकर अपनी ससुराल से मायके जा रही थी। टेम्पो में उसके गांव के चरन सिंह, मुरारी, सरोज, महावीर और हलुका भी सवार थे।
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वादनी ने आरोप लगाया कि सरोज ने उसके बच्चे को अपनी गोद में ले लिया और सभी आरोपियों ने बच्चे को सड़क पर पटककर मारने की धमकी दी। इसके बाद, वे उसे जबरन इरादतनगर के गांव छक्की की गढ़ी ले गए। वहाँ चरन सिंह, मुरारी और महावीर ने उसके साथ दुराचार किया और उसके गहने व नकदी छीन ली।
आरोप था कि आरोपियों ने उसे दो दिन तक बंधक बनाए रखा और बाद में बेचने की कोशिश कर रहे थे, तभी आगरा के सेवला पर उसके पति और जेठ ने उसे छुड़ा लिया।
विवेचना और अदालत का फैसला:
धौलपुर में मामला दर्ज होने के बाद, घटना स्थल इरादतनगर होने के कारण विवेचना आगरा स्थानांतरित कर दी गई। पुलिस ने विवेचना के दौरान अन्य आरोपियों के नाम हटा दिए और केवल चरन सिंह और मुरारी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
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मामले की सुनवाई के दौरान, वादिनी सहित पाँच गवाहों की गवाही दर्ज हुई। हालांकि, अदालत ने पाया कि वादिनी ने अपनी गवाही में बार-बार विरोधाभासी बयान दिए। इसके अलावा, वह दुराचार के स्थान के बारे में भी अलग-अलग बातें बता रही थी।
आरोपियों के अधिवक्ता एस.पी. सिंह सिकरवार के तर्कों और पुष्ट साक्ष्य के अभाव को देखते हुए, अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।
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